दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और उत्तर प्रदेश से 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी चोरी हुए मोबाइल फोन से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल कर अवैध लेनदेन और रकम की निकासी करते थे।
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क का खुलासा पश्चिम पटेल नगर निवासी एक 88 वर्षीय व्यक्ति से ₹70,000 की कथित साइबर ठगी के बाद हुआ।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित का मोबाइल फोन 19 मई को चोरी हुआ था। इसके दो दिन बाद उन्होंने अपना SIM दोबारा जारी कराया, जिसके बाद उन्हें बैंक खाते से ₹70,000 निकाले जाने के दो अलर्ट मिले।
मामले की शिकायत National Cyber Crime Helpline पर की गई। इसके बाद 23 जुलाई को FIR दर्ज की गई और जांच के दौरान पुलिस को जयपुर, मेरठ और गाजियाबाद से जुड़े नेटवर्क का पता चला।
कैसे काम करता था नेटवर्क?
पुलिस के अनुसार, आरोपी राजस्थान में एक call centre चला रहे थे। वहां तकनीकी रूप से सक्षम सदस्य चोरी हुए मोबाइल फोन से जुड़े बैंक खातों में प्रवेश करते थे।
इसके बाद कथित तौर पर रकम को mule bank accounts में transfer किया जाता था और फिर POS machines तथा online payment channels के माध्यम से रकम निकाली जाती थी।
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पुलिस ने क्या बरामद किया?
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान:
- 52 मोबाइल फोन
- 145 SIM cards
- 70 debit cards
- 6 POS machines
- 6 laptops/tablets
- 4 high-speed internet routers
- ₹4 लाख नकद
बरामद किए गए।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान और उत्तर प्रदेश के निवासियों के रूप में की है।
आम लोगों के लिए जरूरी सीख
यह मामला यह भी दिखाता है कि मोबाइल फोन चोरी होना केवल फोन खोने तक सीमित जोखिम नहीं है। यदि फोन banking applications, OTPs, SIM या अन्य financial services से जुड़ा है, तो तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
फोन चोरी होने पर तुरंत: SIM block करें → बैंक को सूचना दें → 1930 पर cyber fraud report करें → cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें → पुलिस में शिकायत/FIR की प्रक्रिया पूरी करें।
CrimeInDelhi Takeaway:
मोबाइल चोरी होने के बाद केवल नया SIM लेना पर्याप्त नहीं है। अपने bank accounts और digital financial access को भी तुरंत secure करें।
यह रिपोर्ट उपलब्ध पुलिस/मीडिया जानकारी पर आधारित है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाना है।
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