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तकनीक से लैस होती दिल्ली पुलिस: क्राइम ब्रांच ने आयोजित किया मेगा ट्रेनिंग सेशन, 458 अधिकारी हुए प्रशिक्षित

Shahzad Ahmed by Shahzad Ahmed
April 11, 2026
in Events, News
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नई दिल्ली: राजधानी में अपराध नियंत्रण और जांच प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में दिल्ली पुलिस लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में 11 अप्रैल 2026 को जय सिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय के आदर्श ऑडिटोरियम में क्राइम ब्रांच द्वारा एक भव्य एकदिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस हाई-लेवल ट्रेनिंग का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को आधुनिक डिजिटल टूल्स, उन्नत जांच तकनीकों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन में दक्ष बनाना था।

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यह विशेष प्रशिक्षण सत्र स्पेशल पुलिस आयुक्त (क्राइम) देवेेश चंद्र श्रीवास्तव,के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जो दिल्ली पुलिस की तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली पुलिस के विभिन्न जिलों और विशेष जांच इकाइयों से कुल 458 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें 5 डीसीपी, 13 एडिशनल डीसीपी, 104 एसीपी और 325 से अधिक इंस्पेक्टर शामिल रहे। इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि दिल्ली पुलिस अपने पूरे सिस्टम को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए गंभीर है।

ट्रेनिंग सत्र में ANTF, C-DOT, NATGRID, FSL रोहिणी, स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर और CCTNS जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और अधिकारियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया।

स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर (MCOCA) ने संगठित अपराध से जुड़े मामलों में MCOCA प्रस्ताव तैयार करने, जांच की रणनीति बनाने और ट्रायल के दौरान कानूनी प्रक्रिया को मजबूती से पेश करने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी।

वहीं FSL रोहिणी के सहायक निदेशक ने फॉरेंसिक साक्ष्यों के सही तरीके से संग्रह, संरक्षण और ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किसी भी केस में वैज्ञानिक साक्ष्य की शुद्धता और विश्वसनीयता अदालत में केस की सफलता तय करती है।

NATGRID के अधिकारियों ने ‘गांडीव’ और ‘सुदर्शन’ जैसे आधुनिक एप्लिकेशन के उपयोग और उनकी कार्यप्रणाली को समझाया। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों के डेटा को एकीकृत कर जांच एजेंसियों को तेजी और सटीकता से जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

ANTF के इंस्पेक्टर ने NDPS और PITNDPS मामलों में वित्तीय जांच की जटिल प्रक्रियाओं को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि ड्रग्स मामलों में केवल बरामदगी ही नहीं, बल्कि पैसों के ट्रेल को ट्रैक करना भी बेहद जरूरी है, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

C-DOT/CEIR के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों को CEIR पोर्टल के उपयोग के बारे में प्रशिक्षित किया। इसमें चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक करना, बरामद फोन को अनब्लॉक करना, IMEI नंबर के जरिए मोबाइल की लोकेशन ट्रैक करना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया गया।

CCTNS टीम ने नए आपराधिक कानूनों के तहत मॉनिटरिंग सिस्टम की जानकारी दी। इसमें समय सीमा के भीतर फाइनल रिपोर्ट दाखिल करना, ITSSO अनुपालन, ई-शाक्ष्य (E-Shakshya) लिंकिंग, CriMAC के जरिए अलर्ट जनरेशन, जीरो FIR का आदान-प्रदान और DGP/IGP डैशबोर्ड का उपयोग जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

साथ ही, अधिकारियों को CCTNS/ICJS पोर्टल के प्रभावी उपयोग, दैनिक अपराध डायरी तैयार करने और PCR कॉल के विश्लेषण जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) सुरेंद्र कुमार ने सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल जांच की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं, बल्कि पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी भी बनाते हैं।

यह प्रशिक्षण सत्र इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली पुलिस अब पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर तकनीक और डेटा-आधारित जांच प्रणाली को अपना रही है।डिजिटल टूल्स, फॉरेंसिक साइंस और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन के जरिए अपराधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में यह एक मजबूत कदम है।

दिल्ली पुलिस की यह पहल भविष्य में अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Tags: delhi police
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