CrimeInDelhi Data Desk | 20 July 2026
देश में नाबालिगों से जुड़े अपराध के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। National Crime Records Bureau (NCRB) की Crime in India 2024 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देशभर में juveniles के खिलाफ 34,878 मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या 31,365 थी।
NCRB Juvenile Crime Data 2024, यानी एक साल में दर्ज मामलों की संख्या में करीब 11.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ये आंकड़े juvenile crime को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करते हैं—आखिर बच्चे और किशोर अपराध की ओर क्यों बढ़ रहे हैं और उन्हें अपराध से दूर रखने में परिवार, समाज और juvenile justice system की क्या भूमिका हो सकती है?
NCRB Data: एक नजर में
2023: 31,365 मामले
2024: 34,878 मामले
सालाना वृद्धि: 11.2 प्रतिशत
यहां यह समझना जरूरी है कि NCRB में दर्ज मामलों का अर्थ conviction यानी दोषसिद्धि नहीं होता। मामला दर्ज होना, जांच, trial और दोषसिद्धि आपराधिक न्याय प्रक्रिया के अलग-अलग चरण हैं।
इसीलिए juvenile crime के आंकड़ों को समझते समय बच्चों को सीधे ‘अपराधी’ या ‘criminal’ कहना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है।
Juvenile Justice Act क्या कहता है? जानिए 7 महत्वपूर्ण बातें
भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चे, जिन पर किसी अपराध को करने का आरोप है या जो अपराध करते पाए गए हैं, उनके मामलों को Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 के तहत देखा जाता है। कानून में ऐसे बच्चे के लिए “Child in Conflict with Law” शब्द का प्रयोग किया गया है।
1. 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति ‘Child’
Juvenile Justice Act के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी न करने वाले व्यक्ति को ‘child’ माना जाता है। इसलिए किसी मामले में बच्चे की उम्र का निर्धारण महत्वपूर्ण होता है।
2. Juvenile Justice Board देखता है मामले
Child in Conflict with Law से जुड़े मामलों को सामान्य रूप से Juvenile Justice Board (JJB) के समक्ष लाया जाता है। Juvenile Justice framework में बच्चे के rehabilitation और social reintegration को भी महत्व दिया गया है।
3. Bail को लेकर अलग प्रावधान
JJ Act की Section 12 child in conflict with law की bail से संबंधित है। कानून बच्चे की bail का प्रावधान करता है। हालांकि, निर्धारित परिस्थितियों में bail से इनकार किया जा सकता है—जैसे रिहाई से बच्चे के किसी known criminal के संपर्क में आने, moral, physical या psychological danger में पड़ने, या उसकी रिहाई से ends of justice defeat होने की reasonable grounds दिखाई दें।
4. 16 से 18 वर्ष और Heinous Offence
यदि 16 से 18 वर्ष की आयु के बच्चे पर किसी heinous offence का आरोप है, तो उसे स्वतः adult की तरह trial के लिए नहीं भेजा जाता।
JJ Act की Section 15 के तहत Juvenile Justice Board preliminary assessment करता है। इसमें alleged offence करने की mental और physical capacity, उसके consequences को समझने की क्षमता और कथित अपराध की परिस्थितियों का आकलन किया जाता है।
5. Preliminary Assessment कोई Trial नहीं
Section 15 के तहत preliminary assessment बच्चे को दोषी ठहराने की प्रक्रिया नहीं है। इसके बाद कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार यह तय किया जाता है कि मामले को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाएगा।
इसलिए गंभीर अपराध का आरोप लगने मात्र से किसी 16–18 वर्ष के बच्चे को स्वतः adult offender नहीं माना जा सकता।
6. Rehabilitation पर भी जोर
Juvenile Justice Act का framework केवल punishment पर आधारित नहीं है। इसमें बच्चे की care, protection, development, treatment, rehabilitation और social reintegration को भी महत्व दिया गया है।
7. बच्चे की पहचान की सुरक्षा
Child in Conflict with Law की पहचान प्रकाशित करते समय विशेष सावधानी जरूरी है। Juvenile Justice Act बच्चे की identity और privacy की सुरक्षा करता है। मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को ऐसे मामलों की reporting में बच्चे का नाम, तस्वीर या ऐसी जानकारी प्रकाशित नहीं करनी चाहिए जिससे उसकी पहचान उजागर हो सकती हो, सिवाय कानून द्वारा अनुमत परिस्थितियों के।
बढ़ते Juvenile Crime के आंकड़े क्यों महत्वपूर्ण हैं?
NCRB 2024 में दर्ज 34,878 मामलों को केवल crime statistics के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
Juvenile crime के पीछे पारिवारिक परिस्थितियां, शिक्षा से दूरी, peer pressure, substance abuse, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां और criminal networks के संपर्क में आना जैसे कई संभावित कारक हो सकते हैं।
हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और NCRB के आंकड़े स्वयं किसी एक कारण को juvenile crime में वृद्धि के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराते।
फिर भी, मामलों की संख्या में 11.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि prevention और rehabilitation mechanisms पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
दिल्ली के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
देश की राजधानी और एक बड़े महानगर के रूप में दिल्ली में juvenile crime का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
ऐसे मामलों की reporting करते समय किसी नाबालिग की पहचान सार्वजनिक न करने और Juvenile Justice Act के तहत उसकी privacy और identity protection से जुड़े प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।
साथ ही, किसी मामले में आरोपी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषी पाए जाने के बीच अंतर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
CrimeInDelhi Analysis
NCRB 2024 में juvenile crime से जुड़े मामलों में दर्ज 11.2 प्रतिशत की वृद्धि केवल policing का मुद्दा नहीं है।
बच्चों और किशोरों को अपराध से दूर रखने के लिए early intervention, शिक्षा, परिवार और समुदाय की भागीदारी, counselling और rehabilitation जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
विशेष रूप से बच्चों को आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने या उन्हें अपराध की ओर धकेले जाने की परिस्थितियों को समझना और रोकना भी महत्वपूर्ण है।
NCRB के आंकड़े समस्या का आकार समझने में मदद करते हैं, लेकिन समाधान के लिए crime prevention और child protection—दोनों पर साथ काम करना जरूरी है।
CrimeInDelhi Legal Note
Juvenile crime की reporting में “juvenile criminal” या “juvenile killer” जैसे शब्दों के बजाय “Child in Conflict with Law”, “नाबालिग पर अपराध का आरोप” या “मामले में नाबालिग की कथित संलिप्तता” जैसे शब्दों का प्रयोग अधिक उपयुक्त है।
CrimeInDelhi की NCRB Data Series में हम आगे दिल्ली से जुड़े juvenile crime के आंकड़ों का अलग से विश्लेषण करेंगे और यह समझेंगे कि 2024 के आधिकारिक आंकड़ों में राजधानी की स्थिति क्या रही।
Source: National Crime Records Bureau (NCRB), Crime in India 2024, Ministry of Home Affairs, Government of India.
Data Note: NCRB के आंकड़े registered cases को दर्शाते हैं। Registered case को conviction नहीं माना जाना चाहिए। आंकड़ों की व्याख्या संबंधित NCRB tables और उनकी statistical definitions के संदर्भ में की जानी चाहिए।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध NCRB crime statistics के आधार पर जन-जागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी बच्चे या व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है।







