नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और अस्थायी प्रतिबंधों के संबंध में विस्तृत बयान जारी किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को समाप्त करना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ को नियंत्रित करना और प्रदर्शनकारियों सहित आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त एवं जनसंपर्क अधिकारी राजीव रंजन, ने कहा कि नई दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सार्वजनिक सुरक्षा और शहर के सामान्य कामकाज के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली में संवैधानिक पदाधिकारियों के कार्यालयों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था का विशेष महत्व है। इसके साथ ही क्षेत्र में रहने वाले लोगों, सरकारी एवं निजी कर्मचारियों, व्यापारियों, दुकानदारों और प्रतिदिन आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी दृष्टिकोण से जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा संबंधी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में जुलाई में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर एक दिन के प्रदर्शन के लिए अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन लगभग एक महीने तक जारी रहा। पुलिस का दावा है कि इस अवधि के दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,000 से अधिक व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं और स्थिति बिगड़ने के बाद हुई झड़पों में निर्दोष छात्र भी घायल हुए।
पुलिस ने इन घटनाओं को आधार बनाते हुए कहा कि किसी भी नए प्रदर्शन की अनुमति और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर निर्णय लेते समय पिछले अनुभवों को ध्यान में रखना आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से अप्रिय घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति में इन आंकड़ों और आरोपों के समर्थन में विस्तृत घटना-वार जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इन्हें दिल्ली पुलिस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान केवल प्रदर्शनकारियों ही नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और आसपास से गुजरने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिंसा या झड़प जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए और सभी पक्षों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए।
पुलिस के मुताबिक, पिछले प्रदर्शनों के दौरान सामने आई परिस्थितियों को देखते हुए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी उद्देश्य से भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक आवागमन को लेकर पहले से तैयारी करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति में दिल्ली पुलिस ने पिछले सप्ताह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल कुछ व्यक्तियों द्वारा महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पुलिस ने कहा है कि इन मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान सभी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।
हालांकि, इस संबंध में विज्ञप्ति में आरोपियों की पहचान, दर्ज मुकदमों या जांच की स्थिति का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इन घटनाओं को फिलहाल पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना उचित है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर उपलब्ध जगह और भीड़ प्रबंधन की सीमाओं का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार, यह अपेक्षाकृत छोटा क्षेत्र है, जहां एक समय में लगभग 1,000 लोगों को सुरक्षित रूप से समायोजित किया जा सकता है।पुलिस का कहना है कि किसी भी स्थान पर एकत्र होने वाले लोगों की संख्या तय करते समय उपलब्ध जगह, प्रवेश और निकास के रास्ते, आपातकालीन सेवाओं की पहुंच, यातायात और भीड़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।
यदि किसी सीमित क्षेत्र में क्षमता से अधिक लोग एकत्र हो जाते हैं, तो लोगों की आवाजाही बाधित हो सकती है और आपात स्थिति में बचाव कार्य करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पर्याप्त व्यवस्था करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अधिकार है। नागरिकों को अपनी समस्याओं, मांगों और असहमति को शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना भी जरूरी है।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन से पहले अनुमति लेने से अधिकारियों को यह जानकारी मिलती है कि कार्यक्रम कहां आयोजित होगा, कितने समय तक चलेगा और उसमें कितने लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके आधार पर यातायात व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं की तैयारी की जा सकती है।
पुलिस ने यह भी कहा कि पूर्व अनुमति की व्यवस्था का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन को सुविधाजनक बनाना और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी को कम करना है। इससे दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं का कामकाज भी सामान्य रूप से जारी रखने में मदद मिलती है।
प्रेस विज्ञप्ति में दिल्ली पुलिस ने कहा कि CJP द्वारा प्रस्तावित जमावड़े के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। पुलिस ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के उस व्यापक सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
पुलिस ने आयोजकों से अपील की है कि वे प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को लागू कानूनों और बिना आवश्यक अनुमति आयोजित जमावड़े में भाग लेने के संभावित कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी दें।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन में नियमों का पालन करना और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना जरूरी है, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी केवल राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं, व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती हैं और प्रतिदिन हजारों लोग विभिन्न कार्यों के लिए आवागमन करते हैं।
ऐसे में किसी भी बड़े प्रदर्शन के कारण यातायात, सार्वजनिक आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के अधिकार और आम जनता की सुरक्षा, सुविधा तथा आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इसी कारण पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजन से पहले अनुमति, उचित स्थान, संभावित भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, वर्तमान में लागू प्रतिबंध अस्थायी और एहतियाती प्रकृति के हैं। इनका उद्देश्य लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करना, जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भीड़ को रोकना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना तथा प्रदर्शनकारियों, स्थानीय निवासियों, दुकानदारों, यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पुलिस का कहना है कि सुरक्षा संबंधी कदम उठाते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी संभावित अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। साथ ही, लोगों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने के अवसर और शहर के सामान्य कामकाज के बीच उचित संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त एवं जनसंपर्क अधिकारी राजीव रंजन, आईपीएस ने कहा कि लोगों को अपनी चिंताओं और मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने का अवसर मिलना चाहिए। पुलिस की जिम्मेदारी ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जिनमें लोग सुरक्षित रूप से अपनी बात रख सकें और शहर का सामान्य जनजीवन भी सुचारु रूप से चलता रहे।
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में दोहराया कि जंतर-मंतर पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से संबंधित एहतियाती उपाय हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन आयोजकों से सहयोग और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अपेक्षित है।





