दिल्ली पुलिस, NSG, सेना, NDRF, CISF समेत कई एजेंसियों ने लिया हिस्सा; 7 अगस्त सुबह 10 बजे से 8 अगस्त तड़के 4 बजे तक चला मेगा सुरक्षा अभ्यास
नई दिल्ली,स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) समेत विभिन्न सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर काउंटर टेररिज्म अभ्यास ‘सुदर्शन शक्ति-V’ आयोजित किया। इस अभ्यास का मकसद राजधानी में किसी भी संभावित आतंकी हमले या बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखना था।
यह पांचवां वार्षिक संयुक्त काउंटर टेररिज्म अभ्यास है। पहले इसे ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के नाम से आयोजित किया जाता था। गृह मंत्रालय के तत्वावधान में होने वाले इस अभ्यास का समन्वय NSG और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किया।

‘सुदर्शन शक्ति-V’ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल स्वत, नई दिल्ली, सेंट्रल, नॉर्थ, ईस्ट, साउथ, साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट जिलों की पुलिस ने हिस्सा लिया। इसके अलावा रेंज बम डिस्पोजल स्क्वॉड और दिल्ली पुलिस की अन्य विशेष इकाइयां भी अभ्यास में शामिल रहीं।
ट्रैफिक पुलिस, क्राइम ब्रांच, IGI एयरपोर्ट, दिल्ली मेट्रो और पीसीआर जैसी इकाइयों को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया गया, ताकि किसी बड़े आतंकी हमले की स्थिति में कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, संदिग्धों की तलाश, घेराबंदी, बचाव एवं राहत कार्य और आपातकालीन प्रतिक्रिया को एक साथ संचालित करने की क्षमता का आकलन किया जा सके।

इस मेगा अभ्यास में दिल्ली पुलिस और NSG के अलावा भारतीय सेना, NDRF, CISF एयरपोर्ट सिक्योरिटी, BCAS, AAI, CISF मेट्रो सिक्योरिटी, DMRC, फायर सर्विस, जिला आपदा प्रबंधन, FSL, CATS एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं समेत कई महत्वपूर्ण एजेंसियों ने भाग लिया।
अभ्यास का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि अलग-अलग एजेंसियों की भूमिका को एकीकृत तरीके से परखा गया। किसी आतंकी घटना के बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, आग पर काबू पाने, विस्फोटक या संदिग्ध वस्तुओं की जांच, इलाके को सुरक्षित करने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने जैसी परिस्थितियों का भी आकलन किया गया।
अभ्यास के दौरान दिल्ली के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर अलग-अलग आतंकी हमलों की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार की गईं। इनमें सबते आईएसबीटी कश्मीरी गेट, कनॉट प्लेस, नेहरू प्लेस मार्केट, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली सचिवालय, जेएलएन स्टेडियम, आईजीआई एयरपोर्ट, V3S मॉल, रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन, संस्कृत स्कूल, इस्कॉन मंदिर और कालकाजी मंदिर जैसे प्रमुख स्थान शामिल रहे।

इन स्थानों पर अलग-अलग तरह के संकट पैदा किए गए और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को परखा गया। इसका उद्देश्य यह देखना था कि एक साथ या अलग-अलग स्थानों पर होने वाली आतंकी घटनाओं के दौरान सुरक्षा एजेंसियां कितनी तेजी से स्थिति को नियंत्रित कर सकती हैं।
अभ्यास में सिमल्टेनियस ब्लास्ट यानी एक ही समय पर कई स्थानों पर विस्फोट होने जैसी स्थिति भी बनाई गई। इसके साथ ही अंधाधुंध गोलीबारी की परिस्थिति तैयार कर सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले घटनास्थल की सुरक्षा, हमलावरों को निष्क्रिय करना, इलाके की घेराबंदी, नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों तक मेडिकल सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को परखा गया।
‘सुदर्शन शक्ति-V’ में होस्टेज सिचुएशन यानी आतंकियों द्वारा लोगों को बंधक बनाए जाने की स्थिति भी तैयार की गई। इस दौरान कमांडो टीमों की रणनीति, त्वरित हस्तक्षेप और बंधकों को सुरक्षित निकालने की क्षमता का आकलन किया गया।
इसके अलावा विमान हाईजैक जैसी बेहद गंभीर परिस्थिति को भी अभ्यास में शामिल किया गया। IGI एयरपोर्ट को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और संभावित हाईजैक संकट से निपटने की तैयारियों को परखा गया।
अभ्यास के दौरान CBRNE अटैक की स्थिति भी तैयार की गई। CBRNE का मतलब केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर और एक्सप्लोसिव खतरों से है।
इस तरह के हमले की स्थिति में सामान्य आतंकी हमले की तुलना में अलग तरह की विशेषज्ञता और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है। इसलिए संबंधित विशेषज्ञ एजेंसियों की भूमिका, संदिग्ध क्षेत्र को सुरक्षित करने, खतरे की पहचान और प्रभावित लोगों को बचाने की प्रक्रिया का भी परीक्षण किया गया।
अभ्यास के दौरान दिल्ली पुलिस की स्वत टीम ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। कमांडो ने तेजी से प्रतिक्रिया, इंटरवेंशन स्किल्स और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय का प्रदर्शन किया।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्वत कमांडो ने अलग-अलग आतंकी परिस्थितियों में उच्च स्तर की पेशेवर दक्षता दिखाई। विशेष रूप से अचानक उत्पन्न होने वाले खतरे के दौरान त्वरित निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता को परखा गया।
‘सुदर्शन शक्ति-V’ का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रेडेड रिस्पॉन्स सिस्टम की प्रभावशीलता को परखना था। इसके तहत किसी संभावित आतंकी हमले की गंभीरता और प्रकृति के अनुसार
अलग-अलग काउंटर टेररिज्म और सुरक्षा बलों को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय किया गया।
इस प्रक्रिया के जरिए यह आकलन किया गया कि किसी बड़े आतंकी हमले के दौरान स्थानीय पुलिस से लेकर विशेष कमांडो बल, बम डिस्पोजल टीम, फायर सर्विस, आपदा प्रबंधन और मेडिकल टीम तक किस तरह एक साथ काम कर सकती हैं।
यह संयुक्त अभ्यास 7 अगस्त सुबह 10 बजे शुरू हुआ और 8 अगस्त तड़के करीब 4 बजे तक चला। यानी करीब 18 घंटे तक अलग-अलग स्थानों और परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को परखा गया।
अभ्यास के दौरान तैयार किए गए विभिन्न परिदृश्यों का उद्देश्य वास्तविक आतंकी हमले की स्थिति में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के जितना संभव हो सके उतना करीब जाकर सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का परीक्षण करना था।
राष्ट्रीय राजधानी में स्वतंत्रता दिवस समारोह से कुछ दिन पहले आयोजित यह अभ्यास सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 15 अगस्त के दौरान दिल्ली में बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों, ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहती है।
ऐसे में ‘सुदर्शन शक्ति-V’ के जरिए सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी खतरे से निपटने के लिए अपनी संयुक्त तैयारियों को परखा। अभ्यास का उद्देश्य केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि किसी बड़ी घटना के बाद नागरिकों की सुरक्षा, घायलों को चिकित्सा सहायता, आग एवं विस्फोट से निपटना, ट्रैफिक नियंत्रण और आपदा प्रबंधन जैसी सभी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी था।
दिल्ली में आयोजित यह ‘सुदर्शन शक्ति-V’ का पांचवां संस्करण है। पहले इस वार्षिक अभ्यास को ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के नाम से जाना जाता था। गृह मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास का समन्वय NSG और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा किया गया।
अभ्यास के बाद सुरक्षा एजेंसियों को संयुक्त कार्रवाई के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और प्रतिक्रिया व्यवस्था का आकलन करने का अवसर मिला। ऐसे अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों के बीच कम्युनिकेशन, कमांड एवं कंट्रोल, त्वरित तैनाती और संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है।






