नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑपरेशन यूनिट ने एक बड़े और संगठित अंतरराज्यीय शिशु तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच नवजात और शिशु बच्चों को तस्करों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला हुआ था तथा लाखों रुपये लेकर निःसंतान दंपतियों को अवैध रूप से बच्चों की बिक्री करता था।
पुलिस के अनुसार मामले में गिरफ्तार आरोपियों में तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और एक अस्पताल संचालिका तक शामिल हैं, जो कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध गोद लेने की प्रक्रिया को वैध दिखाने में मदद कर रही थी। इस मामले में थाना पहाड़गंज में एफआईआर संख्या 258/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
5 जून 2026 को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट को सूचना मिली कि कुछ लोग एक नवजात बच्चे का सौदा करने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई। पुलिसकर्मियों को ग्राहक बनाकर मौके पर भेजा गया।
जैसे ही आरोपी नवजात शिशु को बेचने के लिए पहुंचे, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से लगभग चार से पांच दिन का एक नवजात बालक सुरक्षित बरामद किया गया। डिकॉय ग्राहकों द्वारा दिए गए 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद कर ली गई।
इस शुरुआती सफलता के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसने एक विशाल अंतरराज्यीय शिशु तस्करी नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
जांच में सामने आया कि ज्योति उर्फ कमलेश इस पूरे नेटवर्क की मुख्य संचालक थी। वह विभिन्न राज्यों से नवजात बच्चों की व्यवस्था कर उन्हें निःसंतान दंपतियों तक पहुंचाने का काम करती थी। उसके साथ शालू और ललित सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।पुलिस को पता चला कि राजस्थान और गुजरात से बच्चों की आपूर्ति करने वाला मुख्य व्यक्ति सायबाभाई घामर उर्फ कालिया था। वहीं विपिन नामक व्यक्ति वाहन चालक के रूप में गिरोह के सदस्यों और बच्चों के परिवहन की जिम्मेदारी निभाता था।
जांच के दौरान प्रतिभा नामक महिला की भूमिका भी सामने आई, जो हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़ी हुई थी और बच्चों की खरीद-फरोख्त में समन्वयक की भूमिका निभाती थी। पुलिस ने उसे और विपिन को 7 जून को गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के समय 2 लाख 92 हजार 400 रुपये नकद बरामद हुए, जो एक नवजात बच्चे की खरीद के लिए रखे गए थे।
जांच के दौरान गुरुग्राम निवासी ओमवती का नाम सामने आया, जो घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। पुलिस के अनुसार वह कई मामलों में बच्चों की व्यवस्था कराने वाली बिचौलिया के रूप में काम करती थी। वह बच्चों को नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। उसे 12 जून को गिरफ्तार किया गया।मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, बेगमपुर की संचालिका डॉ. विवेकी की गिरफ्तारी रही। जांच में पता चला कि अस्पताल का इस्तेमाल तस्करी कर लाए गए बच्चों को रखने, उनकी देखभाल करने और संभावित खरीदारों की पहचान करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार डॉ. विवेकी उन दंपतियों से संपर्क स्थापित करती थीं जो संतान प्राप्ति के लिए अस्पताल आते थे। बाद में फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण संबंधी दस्तावेज और अस्पताल के रिकॉर्ड तैयार कर बच्चों को कानूनी संतान के रूप में दर्शाने की कोशिश की जाती थी। इस तरह अवैध तस्करी को वैध गोद लेने का स्वरूप दिया जाता था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह नवजात बच्चों को 1.5 लाख से 2 लाख रुपये के बीच खरीदता था और बाद में उन्हें 6 से 8 लाख रुपये तक में बेच देता था।जांच में ऐसे कई सौदों का खुलासा हुआ है। एक बच्चे को लगभग 6 लाख रुपये में बेचे जाने की जानकारी मिली है, जबकि दो अन्य बच्चों की बिक्री करीब 9 लाख रुपये में हुई थी। पुलिस का मानना है कि नेटवर्क के माध्यम से इससे भी अधिक बच्चों की तस्करी की गई हो सकती है।
दिल्ली पुलिस ने केवल तस्करों को ही नहीं बल्कि बच्चों को खरीदने वाले लोगों को भी गिरफ्तार किया है।गिरफ्तार खरीदारों में ग्वालियर निवासी मुकेश पाल और रीमा पाल शामिल हैं, जिन्होंने दो बच्चों को खरीदा था। इसके अलावा पानीपत निवासी सनी अरोड़ा और रितु अरोड़ा ने एक बच्चे को खरीदा था। पानीपत की सरिका नामक महिला को भी एक तस्करी किए गए बच्चे को खरीदने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
लगातार तकनीकी निगरानी और कई राज्यों में की गई छापेमारी के बाद पुलिस ने गिरोह के मुख्य सप्लायर सायबाभाई घामर उर्फ कालिया को 17 जून को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में पता चला कि कालिया राजस्थान और गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से नवजात बच्चों की व्यवस्था करता था और उन्हें गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उसकी गिरफ्तारी इस पूरे मामले की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में कुल पांच बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है।इनमें दिल्ली में बरामद नवजात बालक के अलावा हरियाणा के पानीपत से एक चार महीने का बालक और एक अन्य शिशु शामिल है। वहीं मध्य प्रदेश के ग्वालियर से 27 दिन के एक बालक और एक बालिका को बरामद किया गया।पुलिस के अनुसार बचाए गए पांच बच्चों में चार आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित बरामदगी की है—
पांच शिशुओं को सुरक्षित मुक्त कराया गया।
डिकॉय ऑपरेशन में प्रयुक्त 20 हजार रुपये की राशि बरामद की गई।
नवजात बच्चे की खरीद के लिए रखे गए 2.92 लाख रुपये बरामद किए गए।
अस्पताल और जन्म संबंधी दस्तावेजों सहित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक और कानूनी जांच जारी है।
सभी पांच बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। समिति के निर्देशानुसार बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह, ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस बच्चों के वास्तविक माता-पिता की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा बच्चों के रेस्क्यू होने की संभावना है।
इस जटिल और संवेदनशील मामले का खुलासा ऑपरेशन यूनिट की महिला एसआई प्रगति, महिला एसआई यामिनी वत्स, एएसआई हमेंद्र, महिला हेड कांस्टेबल सुषमा, एएसआई सुनील, हेड कांस्टेबल अनुज, हेड कांस्टेबल मोहित और कांस्टेबल इंदरजीत की टीम ने किया। पूरी कार्रवाई इंस्पेक्टर संदीप यादव और एसीपी ऑपरेशन पदम सिंह राणा की निगरानी में तथा सेंट्रल जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई।
यह कार्रवाई न केवल दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि मानव तस्करी और अवैध गोद लेने के संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ा संदेश भी है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के ध्वस्त होने से कई मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ है और देशभर में फैले ऐसे गिरोहों पर भी प्रभावी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।





