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आयकर विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों सपनों से खिलवाड़, दिल्ली पुलिस ने फर्जी भर्ती रैकेट का किया भंडाफोड़

Shahzad Ahmed by Shahzad Ahmed
July 9, 2026
in Crime News, News
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पूर्व आयकर विभाग कर्मचारी समेत तीन गिरफ्तार, 6-7 बेरोजगार युवाओं से करीब 10 लाख रुपये की ठगी, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

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नई दिल्ली,सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ठगने वाले एक संगठित गिरोह का दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि थाना हौज काजी पुलिस ने आयकर विभाग (Income Tax Department) में मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) की नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे फर्जी भर्ती रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में आयकर विभाग का पूर्व MTS कर्मचारी भी शामिल है, जिसने विभाग में वर्षों तक काम करने का फायदा उठाकर बेरोजगार युवाओं को विश्वास में लिया। पुलिस का दावा है कि गिरोह अब तक 6 से 7 युवाओं से लगभग 10 लाख रुपये की ठगी कर चुका है।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अजमेरी गेट निवासी एक युवक ने 18 मई 2026 को थाना हौज काजी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि नवीन प्रकाश, दीपक तिवारी और रोहित चौहान ने उसे आयकर विभाग में MTS की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 2,03,500 रुपये की ठगी की।

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि दिसंबर 2025 में आरोपी नवीन प्रकाश ने खुद को आयकर विभाग का कर्मचारी बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह विभाग में उसकी नौकरी लगवा देगा। इसके बाद उसकी मुलाकात आरोपी दीपक तिवारी से कराई गई, जिसने पहले 5,000 रुपये नकद लिए और बाकी रकम आरोपी रोहित चौहान के बैंक खाते में जमा कराने को कहा।

सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में शिकायतकर्ता ने 22 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच अपनी भविष्य निधि (PF) की पूरी बचत 1,98,500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी। नकद 5,000 रुपये मिलाकर कुल 2,03,500 रुपये आरोपियों ने हड़प लिए।

आरोपियों ने पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए आयकर विभाग के नाम से फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म तैयार किए। कई महीनों तक उसे यह कहकर गुमराह किया गया कि उसकी भर्ती प्रक्रिया पूरी हो रही है और जल्द ही नियुक्ति पत्र तथा पहचान पत्र मिल जाएगा। मार्च 2026 के बाद सभी आरोपी अचानक गायब हो गए, जिसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना हौज काजी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर संदीप कालखंडे को सौंपी गई।

एसएचओ थाना हौज काजी अमरेंद्र कुमार और एसीपी कमला मार्केट की निगरानी में इंस्पेक्टर संदीप कालखंडे के नेतृत्व में एसआई अभिषेक, PSI विवेक ग्रेवाल, हेड कांस्टेबल मातू राम, कांस्टेबल गणेश, हरेंद्र और ए.बी. सिंह की टीम गठित की गई।पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का गहन विश्लेषण किया। लगातार तकनीकी निगरानी, मुखबिरों की सूचना और कई स्थानों पर छापेमारी के बाद 3 जुलाई 2026 को रोहिणी से आरोपी रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं पवन दत्त शर्मा को जांच के दौरान बाउंड डाउन किया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे सोशल मीडिया पर आयकर विभाग में भर्ती के नाम पर फर्जी विज्ञापन डालते थे। बेरोजगार युवाओं से संपर्क कर खुद को कभी गृह मंत्रालय का प्रतिनिधि तो कभी आयकर विभाग से जुड़ा अधिकारी बताते थे।विश्वास जीतने के बाद प्रत्येक अभ्यर्थी से एक से दो लाख रुपये लिए जाते थे। इसके साथ ही उनके आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज जमा कर लिए जाते थे।गिरोह की सबसे बड़ी चालाकी यह थी कि पीड़ितों को दिल्ली के सिविक सेंटर स्थित आयकर विभाग के कार्यालय परिसर और पार्किंग तक ले जाया जाता था। वहीं उनके फर्जी इंटरव्यू और ओरिएंटेशन सेशन आयोजित किए जाते थे ताकि पूरी प्रक्रिया वास्तविक लगे।

उन्हें नकली सर्विस बुक, वेरिफिकेशन फॉर्म और अन्य दस्तावेज दिखाकर बताया जाता था कि उनका सरकारी पहचान पत्र तैयार हो रहा है। हालांकि किसी भी उम्मीदवार को कभी नियुक्ति पत्र, सरकारी आईडी कार्ड या विभाग की आधिकारिक रसीद नहीं दी गई।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश आयकर विभाग के सिविक सेंटर कार्यालय में करीब 15 वर्षों तक MTS कर्मचारी रह चुका था। वह अपने पुराने परिचय और विभाग की जानकारी का इस्तेमाल कर पीड़ितों को विभाग के अंदर ले जाता था, कार्यालय दिखाता था और नौकरी की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी देकर उन्हें विश्वास दिलाता था कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह असली है।

पुलिस के अनुसार गिरोह के प्रत्येक सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी।
तरुण गोस्वामी और उसका साथी सबसे पहले बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे।
रोहित चौहान फर्जी इंटरव्यू आयोजित करता और पैसों का लेन-देन संभालता था।
चिराग अग्रवाल आयकर विभाग के परिसर में युवाओं को लेकर जाता था ताकि भर्ती प्रक्रिया वास्तविक लगे।
पवन दत्त शर्मा और अन्य साथी पूरी साजिश में सहयोग करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने चार मोबाइल फोन, पीड़ितों के पहचान पत्र और दस्तावेज तथा फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी में किया जा रहा था।दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। गिरोह के मुख्य सरगना और अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस फर्जी भर्ती रैकेट में आयकर विभाग का कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल था या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और पीड़ितों की पहचान हो सकती है।

दिल्ली पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को नकद या ऑनलाइन पैसे न दें। सभी सरकारी भर्तियां केवल अधिकृत प्रक्रिया और आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से होती हैं। किसी भी भर्ती संबंधी जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक स्रोतों से करें। आयकर विभाग भी समय-समय पर फर्जी भर्ती से सावधान रहने की सलाह जारी करता है।

Tags: central districtdelhi policePolice station houz qazi
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