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दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 10 और आरोपी गिरफ्तार, 4 मासूमों को बचाया

Shahzad Ahmed by Shahzad Ahmed
July 10, 2026
in Crime News, News
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नई दिल्ली दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने अंतरराज्यीय नवजात शिशु तस्करी गिरोह के खिलाफ चल रही जांच में बड़ी सफलता हासिल करते हुए इस संगठित नेटवर्क के 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में जैविक माता-पिता, दलाल, बिचौलिए, नवजात खरीदने वाले दंपति और एक अस्पताल संचालक भी शामिल हैं। पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर चार और मासूम बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल नौ बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है।

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सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और अविवाहित महिलाओं से नवजात बच्चों को हासिल कर उन्हें संतान की चाह रखने वाले दंपतियों को लाखों रुपये में बेचता था। जांच में कई लाख रुपये के अवैध लेन-देन, बैंक खातों के माध्यम से हुए भुगतान और पूरे मनी ट्रेल का भी खुलासा हुआ है।

मामले का खुलासा 5 जून 2026 को उस समय हुआ, जब सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एंटी नारकोटिक्स सेल को गुप्त सूचना मिली कि पहाड़गंज स्थित आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक नवजात बच्चे की अवैध खरीद-फरोख्त होने वाली है।सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से डिकॉय ऑपरेशन चलाया। ऑपरेशन के दौरान ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे एक नवजात शिशु को कथित खरीदारों को बेचने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने लगभग चार से पांच दिन के नवजात बालक को सुरक्षित बचा लिया तथा डिकॉय ग्राहक द्वारा दी गई 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद कर ली।

इसके बाद थाना पहाड़गंज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-2 प्रशांत चौधरी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। टीम में एसीपी पटेल नगर, एसीपी ऑपरेशन, एसएचओ पहाड़गंज, स्पेशल स्टाफ, महिला जांच अधिकारी और अन्य अनुभवी पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। कानूनी पहलुओं को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ कानूनी सलाहकार की भी सहायता ली गई।

तकनीकी निगरानी, मोबाइल डेटा, बैंक खातों की जांच और विभिन्न राज्यों में लगातार छापेमारी के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया।जांच में सामने आया कि गुजरात के साबरकांठा निवासी सुग्नाबेन गमार और कांतीभाई गमार ने पैसों के लालच में अपने नवजात बेटे को गिरोह के सदस्य शंकर गमार और उसकी साथी साहिबा उर्फ कालिया गमार को बेच दिया था। इसके बाद उसी बच्चे को लाखों रुपये लेकर दूसरे परिवार को बेच दिया गया।पुलिस ने यह भी पता लगाया कि दिल्ली की एक अविवाहित युवती ने गर्भधारण के बाद बच्चे को नहीं रखना चाहा। उसकी डिलीवरी के बाद अस्पताल संचालक ने बच्ची को अपने पास रख लिया और बाद में उसे दूसरे परिवार को सौंप दिया।

जांच में सामने आया कि गिरोह अस्पतालों का इस्तेमाल कर बच्चों की खरीद-फरोख्त को वैध दिखाने की कोशिश करता था।रोहिणी निवासी गरिमा जैन ने हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से नवजात प्राप्त किया, जबकि उसके ससुर सतीश जैन ने कथित तौर पर करीब आठ लाख रुपये देकर बच्चे की व्यवस्था कराई।

उत्तराखंड के ऋषिकेश निवासी केतकी गुप्ता, जो दस वर्षों से संतानहीन थीं, ने लगभग चार लाख रुपये देकर एक नवजात बालक प्राप्त किया।

हरिद्वार निवासी अभा सिंह और अमित प्रताप सिंह, जिनकी पहले से एक बेटी थी, ने पुत्र की चाह में करीब पांच लाख रुपये देकर एक बच्चा खरीदा।

इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक राम प्रकाश निषाद ने वर्ष 2025 में इसी गिरोह के माध्यम से एक बालक खरीदा था।

जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के मुख्य सप्लायर शंकर गमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार शंकर गमार और उसकी सहयोगी साहिबा उर्फ कालिया गमार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की तलाश करते थे और उनसे नवजात बच्चों को खरीदकर दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सक्रिय दलालों तक पहुंचाते थे।

पुलिस ने जांच के दौरान अलग-अलग राज्यों में अभियान चलाकर चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद किया।

रोहिणी (दिल्ली) से 16 दिन का नवजात बालक।
ऋषिकेश (उत्तराखंड) से लगभग एक माह का बालक।
मथुरा (उत्तर प्रदेश) से लगभग एक वर्ष एक माह का बालक।
हरिद्वार (उत्तराखंड) से लगभग आठ माह का शिशु।इन चार बच्चों के साथ अब तक इस मामले में कुल नौ बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।

पुलिस जांच में कई बैंक खातों के माध्यम से हुए लाखों रुपये के लेन-देन का पता चला है। जांच एजेंसियां अब पूरे मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही हैं ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। अस्पताल से जुड़े दस्तावेज, जन्म रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़ा कोई पहलू सामने नहीं आया है। यह गिरोह पूरी तरह मांग और आपूर्ति (Need & Supply) के आधार पर काम करता था। संतान की चाह रखने वाले दंपति गिरोह के संपर्क में आते थे और गिरोह ऐसे परिवारों की तलाश करता था जो आर्थिक मजबूरी या अन्य कारणों से अपने नवजात बच्चों को बेचने के लिए तैयार हों। इसके बाद बच्चों को लाखों रुपये लेकर दूसरे परिवारों को सौंप दिया जाता था।

रेस्क्यू किए गए सभी नौ बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। समिति के निर्देशानुसार बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने के साथ-साथ अन्य बच्चों के रेस्क्यू की भी संभावना है।यदि आप इसे फ्रंट पेज अखबार शैली (बोल्ड हेडलाइन, उपशीर्षक, बॉक्स आइटम और डीसीपी के बयान सहित) चाहते हैं, तो मैं वह प्रारूप भी तैयार कर सकता हूँ।

 

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