आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने बाल सुरक्षा जागरूकता माह के तहत आयोजित किया मेगा गर्ल चाइल्ड काउंसलिंग सेशन, साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकार और आत्मरक्षा पर मिला विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
नई दिल्ली, बालिकाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट ने बाल सुरक्षा जागरूकता माह (Child Safety Awareness Month – July 2026)के तहत सोमवार को रोहिणी के सेक्टर-16 स्थित शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज़ में “सेफ गर्ल चाइल्ड एंड सिक्योर फ्यूचर”विषय पर एक विशाल मेगा गर्ल चाइल्ड काउंसलिंग सेशनआयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव, कानूनी अधिकारों और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें हर परिस्थिति का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए तैयार करना था।

इस जागरूकता कार्यक्रम में आउटर नॉर्थ जिले के 151 सरकारी एवं निजी विद्यालयों से 400 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, विधि विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ और स्वयंसेवी संगठनों के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे सभागार में उत्साह, जागरूकता और संवाद का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तरी रेंज, दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त श्री विजय सिंह** रहे। उन्होंने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज के समय में बेटियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी हर जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और विश्वास का वातावरण तैयार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि किसी भी प्रकार की परेशानी, उत्पीड़न या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस को दें और कभी भी डरकर चुप न रहें।
उन्होंने कहा कि “एक सुरक्षित बेटी ही सुरक्षित समाज और सुरक्षित भारत की नींव है। जब बेटियां जागरूक होंगी, अपने अधिकारों को जानेंगी और आत्मरक्षा में सक्षम होंगी, तभी समाज वास्तविक रूप से सुरक्षित बन सकेगा।”

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने छात्राओं को वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
पहल एनजीओ की टीम ने ‘गुड टच और बैड टच’,’रन, हाइड, टेल’जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी असहज परिस्थिति में घबराने के बजाय स्वयं को सुरक्षित रखते हुए विश्वसनीय व्यक्ति को तुरंत जानकारी देना सबसे पहला कदम होना चाहिए। साथ ही आपदा प्रबंधन से जुड़े बुनियादी उपाय भी बताए गए।
एएनएजे फाउंडेशन के साइबर विशेषज्ञों ने इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि फर्जी लिंक, ऑनलाइन गेमिंग, साइबर बुलिंग, डिजिटल फ्रॉड, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और ओटीपी धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से कैसे बचा जा सकता है। छात्राओं को मजबूत पासवर्ड बनाने, व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत शिकायत करने की सलाह दी गई।
पहार एनजीओ से जुड़े अधिवक्ता ने छात्राओं को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने तथा ‘थिंक बिफोर यू क्लिक’का संदेश दिया। उन्होंने जीरो एफआईआर (Zero FIR) की व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी संज्ञेय अपराध की शिकायत देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, चाहे घटना कहीं भी हुई हो।
एमएआईएमएस (MAIMS) की डॉ. दीपा कौशिक ने महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों, शोषण, मानव तस्करी, बहला-फुसलाकर ले जाने के मामलों तथा अजनबियों से सतर्क रहने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा दिल्ली पुलिस की परिवर्तन टीम द्वारा प्रस्तुत आत्मरक्षा प्रदर्शन रहा। प्रशिक्षकों ने छात्राओं को बिना किसी विशेष उपकरण के, रोजमर्रा की वस्तुओं का उपयोग करते हुए आत्मरक्षा के प्रभावी तरीके सिखाए। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी आपात स्थिति में मानसिक संतुलन, सतर्कता और सही समय पर लिया गया निर्णय स्वयं की सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम पूरी तरह संवादात्मक रहा। छात्राओं ने साइबर अपराध, सोशल मीडिया सुरक्षा, कानूनी अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विद्यालयों में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में सहयोग करने वाली टीम को विशेष किट प्रदान की गई, जबकि विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधियों को बाल सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और महिला सुरक्षा से संबंधित जागरूकता पुस्तिकाएं एवं सूचना सामग्री वितरित की गई, ताकि इन संदेशों को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सके।
आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा केवल कानून लागू करने का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी सोच के साथ दिल्ली पुलिस स्कूलों, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है, ताकि प्रत्येक बच्ची सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सके, अपने अधिकारों को समझे और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सके।
दिल्ली पुलिस ने दोहराया कि भविष्य में भी बाल सुरक्षा, महिला सुरक्षा और साइबर जागरूकता से जुड़े अभियान निरंतर जारी रहेंगे, जिससे समाज में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण और अधिक मजबूत हो सके।





