दिल्ली के जी बी रोड़ कोठा नंबर 56 के तहखानों को तोड़कर निकाली गईं नाबालिग समेत 8 लड़कियां
नई दिल्ली,राजधानी दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में पुलिस ने एक बड़े मानव तस्करी और देह व्यापार गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 8 युवतियों को रेस्क्यू किया है। डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि
इस कार्रवाई में एक 17 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है, जिसे पश्चिम बंगाल से तस्करी कर दिल्ली लाया गया था। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा, नशीले पदार्थ और अवैध शराब भी बरामद की है, जो इस संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है।
यह कार्रवाई 8 अप्रैल 2026 की रात जी बी रोड़ कोठा न 56 स्थित इमारत में की गई, जहां लंबे समय से देह व्यापार और मानव तस्करी की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। पुलिस को मिली गुप्त जानकारी के आधार पर तुरंत एक विशेष टीम गठित की गई। इस ऑपरेशन की निगरानी एसीपी रिनचेन ओंगमु भूटिया द्वारा की गई, एसएचओ कमला मार्किट सी एल मीणा और टीम का नेतृत्व महिला एसआई किरण सेठी ने किया। टीम में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस स्टाफ, एफएसएल टीम, क्राइम टीम और एनजीओ ‘सहयोग केयर फॉर यू’ के सदस्य भी शामिल थे।
पुलिस टीम ने पहले सूचना की पुष्टि के लिए गुप्त निगरानी और स्थानीय इंटेलिजेंस का सहारा लिया। जब यह स्पष्ट हो गया कि संबंधित स्थान पर देह व्यापार का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, तब एक सुनियोजित और समन्वित छापेमारी की गई। पुलिस टीम ने रणनीतिक तरीके से इमारत में प्रवेश किया और वहां मौजूद लोगों को काबू में लिया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि यह स्थान लंबे समय से देह व्यापार के अड्डे के रूप में संचालित हो रहा था। यहां ग्राहकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती थीं और पूरे नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा था।
रेस्क्यू की गई 17 वर्षीय नाबालिग ने पुलिस को बताया कि उसे पश्चिम बंगाल से
बहला-फुसलाकर दिल्ली लाया गया था। ‘आलिया उर्फ पिंकी’ नामक महिला ने उसे यहां लाकर ‘कुमारी’ और उसके पति ‘राहुल’ के हवाले कर दिया। ये दोनों इस अवैध धंधे के मुख्य संचालक बताए जा रहे हैं, जो अलग-अलग राज्यों से लड़कियों को लाकर उनका शोषण कर रहे थे।
पीड़िता ने यह भी बताया कि गोपी राम परिहार उर्फ सूरज और लूमा कांत पांडे उर्फ मोटू इस रैकेट के मैनेजर के रूप में काम करते थे। वे ग्राहकों से पैसे वसूलने, लेन-देन संभालने और पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करने में शामिल थे। पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को 7 अन्य युवतियां भी मिलीं, जिन्हें बेहद तंग और छिपे हुए कमरों में रखा गया था। इनमें पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और नेपाल की महिलाएं शामिल हैं। इन सभी को सुरक्षित बाहर निकालकर आवश्यक कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया के लिए भेजा गया है।
मौके से पुलिस ने ₹1,97,040 नकद, 118 अमेरिकी डॉलर, 70 नेपाली करेंसी नोट (लगभग ₹740 मूल्य) और अन्य विदेशी मुद्रा बरामद की। इसके अलावा 33 ग्राम गांजा, 264 शराब की बोतलें और 478 बीयर कैन भी जब्त किए गए।
जांच के दौरान 7 इस्तेमाल किए गए कंडोम, एक बॉक्स अनयूज्ड कंडोम, संदिग्ध दाग वाले कपड़े (संभवतः वीर्य के निशान), रंग-बिरंगे टोकन, 2 चाकू, लेन-देन से संबंधित पर्चियां, दवाइयां और 8 डायरी/नोटबुक भी मिली हैं। इन दस्तावेजों और सामान से इस बात के पुख्ता संकेत मिलते हैं कि यह एक सुव्यवस्थित और बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा रैकेट था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल तक जुड़े हो सकते हैं। लड़कियों को अलग-अलग राज्यों और सीमावर्ती इलाकों से लाकर दिल्ली में इस नेटवर्क के जरिए शोषण किया जा रहा था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट, अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम (ITP Act), एनडीपीएस एक्ट और एक्साइज एक्ट के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि फरार मुख्य आरोपी राहुल और कुमारी की तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही, इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके विस्तृत नेटवर्क को उजागर करने के लिए जांच जारी है।
यह कार्रवाई न केवल दिल्ली पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मानव तस्करी जैसे संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते ऐसी वारदातों को रोका जा सके।





