नई दिल्ली, साइबर अपराधों के लगातार बढ़ते मामलों और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर की जा रही ऑनलाइन ठगी की घटनाओं को देखते हुए शाहदरा जिला पुलिस ने सोमवार को एक भव्य मेगा साइबर अवेयरनेस प्रोग्राम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न इलाकों से आए 250 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए जागरूक करना तथा उन्हें साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए हथकंडों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
इस अवसर पर स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर जोन-1) देवेश चंद्र श्रीवास्तव, जॉइंट सीपी (ईस्टर्न रेंज) डॉ. अजीत कुमार सिंगला तथा डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि आज साइबर अपराधी लोगों के डर, भरोसे और लालच का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा साइबर अपराधों पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक रहा। कलाकारों ने आम लोगों की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस कॉल, ओटीपी फ्रॉड, यूपीआई धोखाधड़ी, ऑनलाइन निवेश घोटालों और सोशल मीडिया ठगी जैसे मामलों का मंचन किया।
नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी या बैंक अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और उनके बैंक खातों से रकम निकलवा लेते हैं। इस प्रस्तुति को वरिष्ठ नागरिकों ने बेहद सराहा और इसे जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम बताया।
कार्यक्रम के दौरान साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अदालत का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलते हैं।
ठग बैंक, टेलीकॉम कंपनी या सरकारी विभाग का कर्मचारी बनकर गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।खाते को बंद होने से बचाने या केवाईसी अपडेट करने के नाम पर ओटीपी, कार्ड नंबर और बैंकिंग जानकारी मांगी जाती है।
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए कम समय में दोगुना-तीन गुना मुनाफा देने का झांसा देकर लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाया जाता है।अपराधी किसी बहाने से कॉल मर्ज करवाकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं और बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं।
फिशिंग लिंक या नकली लॉगिन पेज के माध्यम से ईमेल और सोशल मीडिया खातों की जानकारी चुराई जाती है।ठग रिश्तेदारों, दोस्तों या प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर पैसे की मांग करते हैं।
फर्जी क्यूआर कोड, नकली भुगतान स्क्रीनशॉट और पेमेंट रिक्वेस्ट के जरिए लोगों को धोखा दिया जाता है।पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में निम्न जानकारी किसी के साथ साझा न करें—ओटीपी
पासवर्ड,एटीएम पिन,डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर
सीवीवी नंबर,इंटरनेट बैंकिंग विवरण,इसके अलावा लोगों को सलाह दी गई कि वे संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, अनजान लोगों द्वारा बताए गए मोबाइल ऐप डाउनलोड न करें और अपने ईमेल व सोशल मीडिया खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर सक्रिय रखें।
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत शिकायत दर्ज कराई जाए तो ठगी गई रकम को फ्रीज कराने और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की कि साइबर अपराध होने पर तुरंत—राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से अपने परिवार, मित्रों और पड़ोसियों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा ने कहा कि साइबर अपराधी हर दिन नए तरीके विकसित कर रहे हैं, इसलिए लोगों को भी लगातार सतर्क और जागरूक रहना होगा।
कार्यक्रम के अंत में शाहदरा पुलिस ने जनता को संदेश दिया—”क्लिक करने से पहले सोचें, भरोसा करने से पहले जांच करें और देर होने से पहले शिकायत करें।”पुलिस का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी न केवल आपकी मेहनत की कमाई बचा सकती है बल्कि आपको साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से भी सुरक्षित रख सकती है।





