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Home Court & Judgements

पुलिस जबरन अपराध कबूल करवाए तो क्या करें? | Police Force Confession

जानिए अपने कानूनी अधिकार

Ravi Tondak by Ravi Tondak
March 7, 2026
in Court & Judgements, Crime News, Law Explained
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forced confession by police
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भारत में पुलिस को अपराध की जांच करने और आरोपियों से पूछताछ करने का अधिकार है। लेकिन कानून पुलिस को किसी भी व्यक्ति से मारपीट, धमकी या दबाव डालकर अपराध कबूल करवाने की अनुमति नहीं देता। दुर्भाग्य से कई मामलों में आरोपियों या संदिग्धों से जबरन कबूलनामा (Forced Confession) करवाने की कोशिश की जाती है।

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ऐसी स्थिति में आम नागरिकों को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

यह लेख आपको बताएगा कि यदि पुलिस आपको अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करे तो कानून आपके लिए क्या सुरक्षा प्रदान करता है और आपको क्या करना चाहिए।

जबरन कबूलनामा कानूनन अवैध है

भारतीय कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अदालत में सामान्यतः स्वीकार्य साक्ष्य नहीं होता।

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 की धारा 23 के अनुसार: पुलिस अधिकारी के सामने किया गया कबूलनामा अभियुक्त के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए स्वीकार्य नहीं होता।

इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति से मारपीट या डराकर झूठा अपराध स्वीकार न करवाया जाए।

संविधान भी देता है सुरक्षा

भारतीय संविधान भी नागरिकों को जबरन कबूलनामे से सुरक्षा देता है।

अनुच्छेद 20(3) – किसी भी आरोपी को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसे “Right against Self-Incrimination” कहा जाता है।

अनुच्छेद 21 – हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। पुलिस द्वारा मारपीट या यातना देना इस अधिकार का उल्लंघन है।

अगर पुलिस मारपीट कर कबूलनामा लेने की कोशिश करे तो क्या करें?

यदि पुलिस पूछताछ के दौरान आपको मारती है या अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करती है, तो निम्न बातें ध्यान रखें:

1. सबसे पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें

यदि पुलिस अत्यधिक हिंसा कर रही है, तो अपनी जान बचाना सबसे महत्वपूर्ण है। कई बार लोग हिंसा रोकने के लिए मजबूरी में कुछ भी कह देते हैं। बाद में अदालत में इसकी सच्चाई बताई जा सकती है।

2. पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा सामान्यतः मान्य नहीं होता

कानून के अनुसार पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अदालत में अपराध सिद्ध करने के लिए स्वीकार नहीं किया जाता।

3. वैध कबूलनामा केवल मजिस्ट्रेट के सामने होता है

किसी भी कबूलनामे को कानूनी रूप से मान्य होने के लिए यह आवश्यक है कि:

  • वह स्वेच्छा से दिया गया हो

  • वह मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किया गया हो

  • उस समय पुलिस का कोई दबाव या उपस्थिति न हो

मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने पर क्या करें?

जब पुलिस आपको अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करे, तब तुरंत निम्न कदम उठाएं:

1. अदालत को सच बताएं

अपने वकील के माध्यम से मजिस्ट्रेट को बताएं कि:

  • पुलिस ने मारपीट की

  • दबाव डालकर कबूलनामा करवाने की कोशिश की

2. मेडिकल जांच की मांग करें

मजिस्ट्रेट से मेडिकल एग्जामिनेशन कराने का अनुरोध करें ताकि आपके शरीर पर चोटों का रिकॉर्ड बन सके।

यह आगे चलकर पुलिस के खिलाफ सबूत बन सकता है।

3. सबूत सुरक्षित रखें

यदि संभव हो तो निम्न प्रकार के सबूत एकत्र करें:

  • चोटों की फोटो

  • मेडिकल रिपोर्ट

  • सीसीटीवी फुटेज

  • गवाहों के बयान

पुलिस द्वारा हिरासत में हिंसा होने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि अदालत को यह पता चलता है कि पुलिस ने अवैध तरीके से मारपीट या दबाव बनाया है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

संभावित कार्रवाई:

  • विभागीय जांच

  • निलंबन (Suspension)

  • आपराधिक मामला दर्ज होना

  • पीड़ित को मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने D.K. Basu vs State of West Bengal (1997) मामले में गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत से संबंधित कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इनमें प्रमुख निर्देश हैं:

  • गिरफ्तारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाए

  • परिवार के सदस्य को सूचना दी जाए

  • आरोपी का मेडिकल परीक्षण किया जाए

  • हिरासत में यातना न दी जाए

ये दिशा-निर्देश पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।

अपने अधिकार जानना क्यों जरूरी है?

भारत में कई लोग अपने कानूनी अधिकारों से अनजान होते हैं, जिसके कारण वे पुलिस के दबाव में आकर गलत कबूलनामा कर देते हैं।

यदि आपको अपने अधिकारों की जानकारी है तो:

  • आप अवैध दबाव से बच सकते हैं

  • अदालत में सही तरीके से अपनी बात रख सकते हैं

  • पुलिस की गैरकानूनी कार्रवाई के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं

कानून किसी भी व्यक्ति को पुलिस द्वारा मारपीट या दबाव डालकर अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं देता।

यदि पुलिस ऐसा करने की कोशिश करती है, तो याद रखें:

  • पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा सामान्यतः मान्य नहीं होता

  • वैध कबूलनामा केवल मजिस्ट्रेट के सामने ही होता है

  • अदालत को तुरंत जानकारी दें

  • मेडिकल जांच और सबूत सुरक्षित करें

कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी निर्दोष व्यक्ति से जबरन अपराध स्वीकार करवाना।

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Tags: Bharatiya Sakshya Adhiniyam 2023citizens legal rights indiacrime in delhi legal awarenesscriminal law awarenesscustodial violence indiaforced confession rightsknow your lawsKnow Your Legal Rightsknow your rightspolice confession law indiapolice custody rights
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