कमला मार्किट पुलिस ने दो महिलाओं को कराया मुक्त, तीन आरोपी महिलाएं गिरफ्तार; एक पीड़िता को पश्चिम बंगाल से दिल्ली लाकर कथित तौर पर बेचा गया, दूसरी को बेटे की हत्या की धमकी देकर देह व्यापार के लिए मजबूर करने का आरोप
नई दिल्ली, राजधानी दिल्ली के बदनाम जीबी रोड इलाके में महिलाओं की कथित मानव तस्करी और शोषण के एक बड़े मामले का थाना कमला मार्किट पुलिस ने पर्दाफाश किया है।
डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने जीबी रोड स्थित कोठा नंबर-58 में कार्रवाई करते हुए दो महिला पीड़िताओं को सुरक्षित मुक्त कराया है, जबकि मामले में तीन महिलाओं गीता, मंजू और पारो खातून को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, पीड़िताओं को अलग-अलग परिस्थितियों में रोजगार का झांसा देकर दिल्ली लाया गया और बाद में कथित तौर पर देह व्यापार के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि एक पीड़िता को पश्चिम बंगाल से नौकरी दिलाने का लालच देकर दिल्ली लाया गया और कथित तौर पर कोठे की देखरेख करने वाली महिला के हाथों सौंप दिया गया। वहीं दूसरी पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे घरेलू काम का भरोसा देकर जीबी रोड लाया गया और जब उसने देह व्यापार करने से इनकार किया तो उसके आठ वर्षीय बेटे को जान से मारने की धमकी दी गई।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि पुलिस के अनुसार, गिरोह से जुड़ी कुछ आरोपी महिलाएं इससे पहले भी मानव तस्करी के एक मामले में आरोपी रह चुकी हैं और फिलहाल अदालत से जमानत पर थीं।
पुलिस के मुताबिक, 26 अगस्त को 60 वर्षीय महिला एस.एस. महिला पुलिस चौकी पहुंची। उसने पुलिस को बताया कि उसकी 26 वर्षीय विवाहित बेटी आर, जो तीन बच्चों की मां है, पश्चिम बंगाल से 2 मई 2026 से लापता है।
पीड़िता ने 25 अगस्त को किसी तरह अपनी मां से संपर्क किया और बताया कि वह दिल्ली के जीबी रोड स्थित कोठा नंबर-58 में है। उसने अपनी मां से उसे वहां से निकालने की गुहार लगाई।
मां की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए महिला पुलिस चौकी की प्रभारी एसआई किरण सेठी ने तत्काल कार्रवाई की। वह महिला कांस्टेबल कोमल और महिला कांस्टेबल रश्मि के साथ कोठा नंबर-58 पहुंचीं और वहां से आर को सुरक्षित बाहर निकाला।
पुलिस पूछताछ में पहली पीड़िता ने बताया कि 2 मई को वह पश्चिम बंगाल के एक रेलवे स्टेशन पर थी। इसी दौरान करीब 30 वर्षीय कालू नामक व्यक्ति ने उससे संपर्क किया। आरोप है कि कालू ने उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और रोजगार की तलाश में उसे अपने साथ दिल्ली ले आया।पीड़िता के मुताबिक, दिल्ली आने के बाद कालू ने कथित तौर पर उसका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे गीता नामक महिला के हवाले कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार, गीता ने पीड़िता को करीब एक महीने तक अपने घर पर रखा। इसके बाद उसे जीबी रोड के कोठा नंबर-58 ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसे कोठे की संचालक रेशमा के हवाले कर दिया गया।पीड़िता ने आरोप लगाया कि इसके बाद उसे उसकी इच्छा के खिलाफ देह व्यापार में धकेल दिया गया। उसके द्वारा कमाए गए पैसों को कथित तौर पर मंजू और गीता अपने पास रखती थीं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कालू की भूमिका क्या थी और क्या वह मानव तस्करी के इस नेटवर्क से सीधे जुड़ा हुआ था।
पहली पीड़िता को बचाने के लिए पुलिस जब कोठा नंबर-58 पहुंची तो इसी दौरान एक अन्य महिला जे ने भी महिला पुलिस चौकी से मदद मांगी। पुलिस ने उसे भी सुरक्षित बाहर निकाला।दूसरी पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो वर्ष पहले पश्चिम बंगाल में पति और सास के साथ उसका विवाद हुआ था। इसके बाद वह अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ घर से निकल गई।
रास्ते में कथित तौर पर एक महिला ने उससे संपर्क किया। आरोप है कि उस महिला ने उसके बेटे को खाना-पीना दिया और उसकी मदद करने का भरोसा देकर दोनों को अपने घर ले गई।अगले दिन महिला कथित तौर पर पीड़िता और उसके बेटे को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर आई। वहां से दोनों को ऑटो के जरिए गीता के घर ले जाया गया।पीड़िता के अनुसार, अगले दिन गीता उसे और उसके बेटे को जीबी रोड स्थित कोठा नंबर-58 ले गई।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे बताया गया था कि उसे झाड़ू-पोंछा करने का काम मिलेगा और इससे वह अपने बेटे का पालन-पोषण कर सकेगी। लेकिन कोठे पर पहुंचने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
उसका आरोप है कि उसे कथित तौर पर देह व्यापार करने के लिए मजबूर किया गया। जब उसने इसका विरोध किया तो उसे धमकी दी गई कि यदि उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसके आठ वर्षीय बेटे को मार दिया जाएगा।पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि उसके द्वारा कमाए गए पैसे कथित तौर पर गीता और मंजू अपने पास रखती थीं।
पीड़िता के अनुसार, कुछ समय बाद उसके बेटे को पारो नामक महिला द्वारा एक हॉस्टल में भेज दिया गया। इसके बाद उसे अपने बेटे से नियमित रूप से मिलने भी नहीं दिया जाता था।
पीड़िता का दावा है कि उसे अपने बेटे से करीब तीन-चार महीने में केवल एक बार मिलने दिया जाता था।अब पुलिस आठ वर्षीय बच्चे का पता लगाने और उसे सुरक्षित बरामद करने के लिए प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बच्चे को किस हॉस्टल में रखा गया था और उसे वहां किसके माध्यम से भेजा गया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है।
गीता (55 वर्ष) जीबी रोड, दिल्ली में रहती है और मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। पुलिस के मुताबिक, वह ब्रॉथल की पिंप/केयरटेकर के रूप में काम करती थी।
मंजू (58 वर्ष)भी जीबी रोड, दिल्ली में रहती है और पश्चिम बंगाल की मूल निवासी है। पुलिस के अनुसार, वह कोठे की देखरेख से जुड़ी थी।
पारो खातून (29 वर्ष) जीबी रोड, दिल्ली में रहती है और मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। पुलिस के अनुसार, वह भी कोठे की देखरेख करने वाली महिलाओं में शामिल थी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन महिलाओं के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कोठा नंबर-58 से 55,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा पुलिस को टोकन, रजिस्टर और बिजली का बिल भी मिला है।जांच एजेंसियां बरामद रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं, ताकि कथित तौर पर कोठे पर आने-जाने वाले लोगों तथा आर्थिक लेनदेन से जुड़े सुराग हासिल किए जा सकें।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि रेशमा, मंजू और गीता पहले भी थाना कमला मार्केट में दर्ज मानव तस्करी और महिलाओं के शोषण से जुड़े एक मामले में आरोपी रह चुकी हैं।यह मामला वर्ष 2025 में दर्ज एफआईआर नंबर 139/25 से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी महिलाएं फिलहाल अदालत से जमानत पर थीं।
इस तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या पुराने मामले और वर्तमान मामले के बीच कोई सीधा संबंध है तथा क्या आरोपी महिलाएं जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हुईं।
दोनों महिलाओं को पुलिस ने सुरक्षित निकालने के बाद लोक नायक अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके साथ ही उन्हें काउंसलिंग भी उपलब्ध कराई गई और उनके बयान दर्ज किए गए।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़िताओं के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं 137(2), 143(2), 144(1), 64(2), 61 और 3(5) के अलावा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (ITP Act) की धाराओं 3, 5 और 6 के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क में उनकी जिम्मेदारियों का पता लगा रही है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस कथित मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना है। पहली पीड़िता के बयान में सामने आए कालू की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं दूसरे मामले में उस महिला की पहचान और भूमिका की जांच की जा रही है, जिसने कथित तौर पर पीड़िता का विश्वास जीतकर उसे अपने साथ ले गई थी।इसके अलावा पुलिस आठ वर्षीय बच्चे को सुरक्षित बरामद करने के लिए भी प्रयास कर रही है।





