दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय cyber-fraud facilitation network का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला एक रिटायर्ड Indian Army Colonel से कथित ₹15.50 लाख के “digital arrest” cyber fraud से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर cyber-fraud syndicates को mule और current bank accounts उपलब्ध कराने में मदद करते थे।
यह कार्रवाई South-West District की Cyber Police Station द्वारा की गई। गिरफ्तारियां Punjab और Rajasthan से की गईं। पुलिस ने जांच के दौरान चार mobile phones और छह SIM cards भी बरामद किए हैं।
Munirka के रिटायर्ड Colonel को कैसे बनाया गया निशाना?
पुलिस के अनुसार, पीड़ित Munirka Enclave, New Delhi में रहते हैं।
मामला 15 April 2026 को सामने आया, जब उन्हें एक call आया जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि Maharashtra Police के आदेश पर उनका telephone connection बंद किया जा रहा है।
इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर पर connect किया गया। वहां एक व्यक्ति ने कथित रूप से police officer बनकर कहा कि उनके personal details का इस्तेमाल Mumbai में एक illegal bank account खोलने के लिए किया गया है।
आरोपियों ने कथित तौर पर उस account को money laundering, investment fraud और terrorist financing जैसे गंभीर आरोपों से जोड़कर पीड़ित पर दबाव बनाया।
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Fake ED, Court और RBI documents से बनाया भरोसा
जांच के अनुसार, fraudsters ने अपने दावों को वास्तविक दिखाने के लिए कथित तौर पर कई forged documents भेजे।
इनमें:
- कथित fake Enforcement Directorate arrest warrant
- fabricated court documents
- fake anticipatory bail document
- Bombay High Court के नाम से कथित fabricated communication
- RBI के नाम से कथित communication
शामिल थे।
इसके बाद पीड़ित और उनकी पत्नी पर लगातार psychological pressure बनाया गया और उन्हें कथित तौर पर “digital arrest” में होने का विश्वास दिलाया गया।
इसी दौरान पीड़ित ने कथित तौर पर अपनी assets की जानकारी साझा की और ₹15.50 लाख एक bank account में transfer कर दिए।
शिकायत के बाद कैसे खुला bank-account network?
पीड़ित ने National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) के माध्यम से शिकायत की।
जांच के बाद police ने कथित money trail को एक Ludhiana-based current bank account तक trace किया। पुलिस के अनुसार, जिस beneficiary account में ₹15.50 लाख transfer किए गए थे, वह पहले से NCRP पर 17 complaints से linked था।
इन complaints में कई States और Union Territories से संबंधित fraudulent transactions शामिल थे और transactions की राशि करोड़ों रुपये में बताई गई है।
यह जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि इससे police को कथित individual fraud के पीछे मौजूद wider account-supply network तक पहुंचने का lead मिला।
चार आरोपी गिरफ्तार
Delhi Police ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है:
- Sarbjit, 38, Ludhiana
- Suraj, 30, Ludhiana
- Sandeep, 32, Ludhiana
- Naresh alias Lucky, Sikar, Rajasthan
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की कथित भूमिका cyber-fraud syndicates के लिए bank accounts procure और supply करने से जुड़ी थी।
Police का आरोप है कि Naresh alias Lucky Telegram के माध्यम से accounts procure करता था और उन्हें Cambodia तथा UAE/Dubai से जुड़े कथित cyber-fraud operators तक पहुंचाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि तीन आरोपी Jaipur गए थे, जहां कथित तौर पर account kit hand over की जानी थी।
क्या बरामद हुआ?
जांच के दौरान police ने:
4 smartphones
6 SIM cards
बरामद किए हैं, जिन्हें कथित cyber offences से जोड़ा गया है।
Digital Arrest Scam में असल तरीका क्या है?
इस तरह के scams में fraudsters खुद को police, CBI, ED, court, RBI या किसी अन्य government authority का अधिकारी बताकर victim को डराते हैं। आमतौर पर victim को बताया जाता है कि:
उसके नाम से कोई illegal account खुला है, या वह money laundering, terrorism financing अथवा किसी अन्य गंभीर अपराध की जांच में फंस गया है।
इसके बाद fake documents, video calls और लगातार monitoring के जरिए victim पर psychological pressure बनाया जाता है। इस मामले में भी police के अनुसार fraudsters ने forged official-looking documents और गंभीर criminal allegations का इस्तेमाल किया।
सबसे जरूरी बात: “Digital Arrest” कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
भारत में “Digital Arrest” नाम की कोई कानूनी custody प्रक्रिया नहीं है।
कोई police officer, ED, CBI, court या RBI अधिकारी किसी व्यक्ति को phone या video call के जरिए “arrest” करके उससे पैसे transfer करने को नहीं कह सकता। इसीलिए अगर कोई व्यक्ति video call पर police uniform में दिखाई दे और कहे:
“आप Digital Arrest में हैं” तो इसे गंभीर red flag मानें।
अगर ऐसा call आए तो क्या करें?
1. तुरंत call disconnect करें।
किसी caller के दबाव में video call पर बने न रहें।
2. पैसे transfer न करें।
Police या किसी government agency के नाम पर verification के लिए भी पैसा transfer न करें।
3. Personal और banking details share न करें।
OTP, PIN, password, card details या account information साझा न करें।
4. Evidence सुरक्षित रखें।
Phone numbers, WhatsApp chats, screenshots, recordings, bank transaction details और भेजे गए documents को delete न करें।
5. तुरंत cyber-fraud report करें।
Financial cyber fraud होने पर 1930 पर report करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर complaint दर्ज करें।
जल्दी reporting करने से transaction trail trace करने और funds को रोकने की संभावना बेहतर हो सकती है।
इस मामले में कानूनी स्थिति क्या है?
मामले में police के अनुसार E-FIR No. 165/26 Cyber Police Station, South-West District में दर्ज की गई थी।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार FIR में Sections 308, 318(4), 319 और 340 of the Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लगाए गए हैं।
हालांकि, FIR में धाराएं लगना और आरोप सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति तब तक दोषी नहीं माने जाते जब तक competent court में आरोप सिद्ध न हो जाएं।
Delhi Police की जांच अभी कथित wider network, money trail और ultimate beneficiaries का पता लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
CrimeInDelhi Legal Takeaway
यह मामला केवल ₹15.50 लाख की ठगी का नहीं है। इसमें fake government identity, forged legal documents, psychological coercion और mule bank accounts जैसे कई layers दिखाई देती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण legal-awareness point यही है:
“Digital Arrest” से डरें नहीं—ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति police, ED, CBI, Court या RBI का नाम लेकर video call पर arrest की धमकी देता है और पैसे transfer करने को कहता है, तो पैसा भेजने के बजाय call disconnect करके तुरंत cyber-fraud report करें।
Source: Delhi Police, South-West District Cyber Police Station; case details reported on 21 August 2026.





