नई दिल्ली,राजधानी दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्थित तकिया काले खां गड्डा क्षेत्र में सोमवार देर रात लगी भीषण आग ने कुछ समय के लिए पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। पुराने फर्नीचर, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। हालांकि सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य आपातकालीन एजेंसियों की त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई के चलते एक बड़ा हादसा टल गया और 12 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। सबसे राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई और न ही कोई घायल हुआ।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 22 जून 2026 की रात लगभग 11:32 बजे थाना कमला मार्केट में पीसीआर कॉल के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि तकिया काले खां गड्डा इलाके में भीषण आग लग गई है। सूचना मिलते ही थाना कमला मार्केट के एसएचओ इंस्पेक्टर नरेश कुमार, पुलिस पोस्ट प्रभारी एसआई विक्रम पाल तथा थाना का रिजर्व स्टाफ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया।
मौके पर पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने देखा कि क्षेत्र में रखे पुराने फर्नीचर, लकड़ी, कबाड़ और अन्य ज्वलनशील सामग्री में आग तेजी से फैल चुकी थी। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और धुएं का घना गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। आग के आसपास बड़ी संख्या में झुग्गियां और रिहायशी क्षेत्र होने के कारण स्थिति बेहद गंभीर थी तथा किसी भी समय बड़ी जनहानि होने की आशंका बनी हुई थी।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पुलिस टीम ने बिना किसी देरी के राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले आसपास रहने वाले लोगों को खतरे के बारे में सतर्क किया और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा। कुछ लोग अपने सामान और घरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने समझदारी और धैर्य का परिचय देते हुए उन्हें मनाया और सुरक्षित बाहर निकाला।
इस दौरान पुलिस ने पूरे परिवारों सहित कुल 12 लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि पुलिस कुछ मिनट भी देर कर देती तो आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती थी और स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), बीएसईएस और सीएटीएस एम्बुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट किया गया। थोड़ी ही देर में विभिन्न एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग बुझाने के लिए कुल 20 फायर टेंडर तैनात किए गए, जबकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 9 सीएटीएस एम्बुलेंस भी मौके पर मौजूद रहीं।
आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी घटनास्थल पर बुलाया गया। पुलिसकर्मियों ने भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और फायर ब्रिगेड एवं अन्य आपातकालीन वाहनों के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस और फायर कर्मियों ने मिलकर लगातार लगभग तीन घंटे तक अभियान चलाया, जिसके बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
स्थानीय निवासियों ने संकट की इस घड़ी में पुलिस और बचाव दलों के साहस, तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। लोगों का कहना था कि पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और स्थिति को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभाई।
क्षेत्र के विधायक ने भी पुलिस और अन्य एजेंसियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समय पर की गई कार्रवाई ने एक संभावित बड़ी त्रासदी को टाल दिया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि उनका कार्य जनता के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह, आईपीएस ने बताया कि पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के कारण स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा दिल्ली पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपातकालीन स्थिति में पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि संकट की घड़ी में पुलिस, अग्निशमन विभाग, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और चिकित्सा सेवाओं के बीच मजबूत समन्वय न केवल जनहानि को रोक सकता है, बल्कि बड़े हादसों को भी टाल सकता है। तकिया काले खां गड्डा की यह घटना दिल्ली पुलिस की तत्परता, साहस और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।





