नई दिल्ली, डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े मोबाइल कारोबार केंद्रों में शामिल करोल बाग के बीडनपुरा इलाके में हुई लगभग 90 लाख रुपये की सनसनीखेज चोरी का दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम ने कुछ ही घंटों में खुलासा कर दिया। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 84 लाख रुपये नकद, चोरी किए गए मोबाइल फोन तथा अन्य महत्वपूर्ण केस प्रॉपर्टी बरामद की है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जिस कर्मचारी पर दुकान मालिक सबसे अधिक भरोसा करता था, वही चोरी की पूरी साजिश का मास्टरमाइंड निकला।
दिल्ली पुलिस के अनुसार यह मामला न केवल बड़ी रकम की चोरी का था, बल्कि बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया अपराध था। हालांकि पुलिस ने वैज्ञानिक जांच, तकनीकी साक्ष्यों और लगातार की गई छापेमारी के जरिए पूरे षड्यंत्र का कुछ ही घंटों में पर्दाफाश कर दिया।
24 जून 2026 की दोपहर करीब 2:33 बजे करोल बाग थाना पुलिस को सूचना मिली कि बीडनपुरा स्थित एक मोबाइल थोक व्यापारी की दुकान में बड़ी चोरी हुई है। सूचना मिलते ही थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची।
शिकायतकर्ता, जो हरियाणा के हिसार जिले के मंडी आदमपुर के निवासी हैं, ने पुलिस को बताया कि सुबह जब दुकान खोली गई तो अंदर का पूरा सामान बिखरा हुआ मिला। जांच करने पर पता चला कि रात के दौरान अज्ञात बदमाश दुकान से लगभग 90 लाख रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन और दुकान में लगे सीसीटीवी सिस्टम का डीवीआर चोरी कर ले गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को बुलाया। घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण किया गया, फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य जुटाए गए तथा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर उनकी गहन जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता और चोरी गई भारी रकम को देखते हुए करोल बाग थाना पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें जांच अधिकारी और क्रैक टीम के पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। साथ ही सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की स्पेशल स्टाफ को भी जांच में लगाया गया। पूरी कार्रवाई एसीपी करोल बाग की निगरानी में संचालित की गई।जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, दुकान से जुड़े सभी कर्मचारियों और आसपास के लोगों से पूछताछ की तथा सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। धीरे-धीरे जांच इस निष्कर्ष पर पहुंची कि चोरी किसी ऐसे व्यक्ति ने कराई है जिसे दुकान की पूरी व्यवस्था, नकदी रखने की जगह और चाबियों की जानकारी थी।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को दुकान के कर्मचारी **रवि उर्फ महिपाल** पर संदेह हुआ। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि रवि ही पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड था।पुलिस जांच में सामने आया कि रवि हर रात दुकान बंद करता था और उसके पास दुकान की चाबियों तक नियमित पहुंच थी। उसे यह भी अच्छी तरह मालूम था कि कारोबार समाप्त होने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी दुकान के अंदर ही रखी जाती है।करीब दो दिन पहले रवि ने चोरी की योजना के तहत अपने साथियों अंश, मनीष और दीपांशु को दुकान की मूल चाबी उपलब्ध कराई ताकि उसकी डुप्लीकेट चाबी तैयार की जा सके। डुप्लीकेट चाबी बनने के बाद सभी ने मिलकर चोरी की पूरी योजना तैयार की।
23 और 24 जून की दरमियानी रात आरोपी अंश और मनीष मास्क पहनकर दुकान पहुंचे। उन्होंने डुप्लीकेट चाबी से बिना किसी ताले को तोड़े दुकान खोली और अंदर रखे लगभग 90 लाख रुपये, पांच मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी डीवीआर चोरी कर लिया।वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से रवि अगले दिन सामान्य कर्मचारी की तरह दुकान पहुंचा और खुद को पूरी तरह निर्दोष दिखाने का प्रयास किया। लेकिन वैज्ञानिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने उसकी पूरी साजिश उजागर कर दी।जैसे ही आरोपियों की पहचान सुनिश्चित हुई, करोल बाग थाना पुलिस और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ ने मंगोलपुरी क्षेत्र में एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी।
एक टीम ने आरोपी मनीष और दीपांशु को उनके घरों से गिरफ्तार किया, जबकि दूसरी टीम ने आरोपी अंश के ठिकाने पर छापा मारकर उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस को अंश के कब्जे से तीन बैगों में रखे 84 लाख रुपये नकद बरामद हुए।इसके बाद पुलिस ने मास्टरमाइंड रवि उर्फ महिपाल को भी गिरफ्तार कर लिया। चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने कुछ ही घंटों में पूरे मामले का खुलासा कर दिया।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—84 लाख रुपये नकद,चोरी किए गए मोबाइल फोन,अन्य केस प्रॉपर्टी बरामद की है। पुलिस के अनुसार चोरी की गई नकदी मंगोलपुरी स्थित आरोपी अंश के एक रिश्तेदार के खाली मकान में छिपाकर रखी गई थी।पूछताछ में रवि ने स्वीकार किया कि उसने ही पूरी योजना बनाई थी और अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस अब शेष चोरी गई रकम और अन्य सामान की बरामदगी के प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों का किसी अन्य चोरी या संगठित अपराध में भी हाथ तो नहीं है।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और समन्वित छापेमारी के कारण लगभग 90 लाख रुपये की हाई-वैल्यू चोरी का मामला कुछ ही घंटों में सुलझा लिया गया। चोरी की अधिकांश रकम बरामद कर ली गई और चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है तथा आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन किया जा रहा है।





