नई दिल्ली, केंद्रीय जिला दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2026 के बाल सुरक्षा माह का समापन एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल के साथ किया। इस अवसर पर केंद्रीय एवं उत्तर जिले के विभिन्न सरकारी विद्यालयों, ट्रस्टों और अनाथालयों के करीब 200 बच्चों को अरुण जेटली स्टेडियम में आयोजित दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2026 के उद्घाटन समारोह और पहले मुकाबले सेंट्रल दिल्ली किंग्स तथा पुरानी दिल्ली 6 के बीच खेले गए रोमांचक मैच का आनंद लेने का अवसर प्रदान किया। यह कार्यक्रम पूरे महीने चलाए गए बाल सुरक्षा जागरूकता अभियान का भव्य समापन रहा।
स्टेडियम पहुंचे बच्चों ने रंगारंग उद्घाटन समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रोमांचक क्रिकेट मुकाबले का भरपूर आनंद लिया। प्रसिद्ध गायिका सुनंदा शर्मा की प्रस्तुति ने बच्चों का उत्साह और बढ़ा दिया। पहली बार इतने बड़े खेल आयोजन का हिस्सा बनने वाले कई बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के अंत में दिल्ली पुलिस ने सभी बच्चों को स्मृति-चिह्न के रूप में विशेष टी-शर्ट और जलपान भी उपलब्ध कराया।

कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-प्रथम, केंद्रीय जिला ने बच्चों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है और किसी भी प्रकार की परेशानी, शोषण या अपराध की स्थिति में तुरंत पुलिस की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने बच्चों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपने स्कूल व समाज में अन्य बच्चों को भी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
इस दौरान बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने साइबर ठगी, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग तथा इंटरनेट पर अजनबियों से सावधान रहने के बारे में भी बच्चों को जागरूक किया। कई बच्चों ने हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी साझा करते हुए दिल्ली पुलिस के इस प्रयास की सराहना की।

केंद्रीय जिला पुलिस ने जुलाई 2026 के दौरान स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, पुलिस थानों और विभिन्न सामुदायिक स्थानों पर 40 से अधिक जागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन अभियानों के माध्यम से 30 हजार से अधिक बच्चों, अभिभावकों और अन्य नागरिकों को बाल सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, आत्मरक्षा, नशा मुक्ति, आपातकालीन हेल्पलाइन तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई।
दिल्ली पुलिस की ‘नाजुक’ और ‘निर्भीक’ पहल के तहत 6,000 से अधिक बच्चों को गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और आपातकालीन हेल्पलाइन के बारे में शिक्षित किया गया। वहीं #SmartBacche अभियान के माध्यम से स्कूली बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा श्रवण बाधित विद्यार्थियों, एनसीसी की छात्राओं, प्रशिक्षु महिला डॉक्टरों, विधि के छात्रों और दिल्ली गेट स्थित ऑब्जर्वेशन होम में रह रहे कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, ताकि समाज के हर वर्ग तक बाल सुरक्षा का संदेश पहुंच सके।
बाल सुरक्षा माह के दौरान केंद्रीय जिला पुलिस ने केवल जागरूकता अभियान ही नहीं चलाया, बल्कि ऑपरेशन मिलाप के तहत 25 लापता बच्चों को खोजकर सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाने में भी सफलता हासिल की। यह उपलब्धि बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति दिल्ली पुलिस की संवेदनशील एवं मानवीय कार्यशैली को दर्शाती है।
केंद्रीय जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह, ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, संरक्षित और सकारात्मक वातावरण में आगे बढ़ने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, समाज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से एक सुरक्षित, जागरूक और बाल-मित्र समाज का निर्माण किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय जिला दिल्ली पुलिस भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता अभियानों को निरंतर जारी रखेगी, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके और वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें।





