नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में बिल्डर से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले हाई-प्रोफाइल मामले का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है।डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने इस मामले में अंतरराज्यीय रंगदारी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे अपराध के पीछे स्थानीय बिल्डर और होटल कारोबारी की मिलीभगत सामने आई है, जिन्होंने गैंग को ठहराने, बैठकें कराने और शिकायतकर्ता के परिवार की जानकारी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्य आरोपी और शूटर पवन कुमार उर्फ पवन पहलवान को आईपी एस्टेट इलाके में पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया, जबकि साजिश का एक अन्य मुख्य आरोपी शक्ति सिंह को कोलकाता से पकड़कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई के साथ पूरे गिरोह की साजिश का खुलासा हो गया है और अपराधियों की आतंक फैलाने की योजना को नाकाम कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक,29 जून 2026 को थाना नबी करीम क्षेत्र के आर्य नगर स्थित एक निजी बिल्डर के कार्यालय में हथियारबंद बदमाश पहुंचा। उसने बिल्डर से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और तत्काल पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके साथी आसपास मौजूद हैं और पैसे नहीं मिलने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
जब बिल्डर ने रंगदारी देने से इनकार कर दिया तो आरोपी ने जान से मारने की नीयत से गोली चला दी और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पहाड़गंज सौरभ ए. नरेंद्र (आईपीएस) के नेतृत्व में थाना नबी करीम, स्पेशल स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों की कई टीमें बनाई गईं।
जांच के दौरान पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण किया, होटल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और मुखबिरों की सूचनाओं को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं। पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने घटना से पहले कई बार दिल्ली में बैठकें की थीं और शिकायतकर्ता के कार्यालय की रेकी भी की थी। पूरी योजना पहाड़गंज के एक होटल में बैठकर बनाई गई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले विशाल भाटी उर्फ भांजा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पूरे गिरोह और साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे किए। उसके बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अन्य आरोपियों तक पहुंची और पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि स्थानीय बिल्डर एवं होटल कारोबारी पवन कुमार उर्फ पवन चेतली और उसका सहयोगी राजेश सचदेवा उर्फ सोनू मोटाइस पूरी साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।
पुलिस के अनुसार दोनों ने अपराधियों को होटल में ठहराया, बैठकों के लिए स्थान उपलब्ध कराया, शिकायतकर्ता और उसके परिवार की गतिविधियों की जानकारी दी तथा पूरी योजना को सफल बनाने के लिए हर तरह की मदद की।जांच में यह भी सामने आया कि पवन चेतली अपने कारोबारी प्रतिद्वंद्वी को डराकर इलाके में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता था। उसने मुख्य आरोपी को शिकायतकर्ता के बेटे को निशाना बनाने की सलाह भी दी ताकि परिवार पर अधिक दबाव बनाया जा सके।
पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी पवन कुमार उर्फ पवन पहलवान, जो हरियाणा के बहादुरगढ़ का रहने वाला है, खुद को फाइनेंसर बताता था, लेकिन उसका असली मकसद पहाड़गंज क्षेत्र में बिल्डरों और व्यापारियों के बीच भय पैदा कर रंगदारी का नेटवर्क खड़ा करना था।
घटना के बाद उसने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो पोस्ट किए। उसने फायरिंग की खबरें साझा कर पुलिस को खुली चुनौती दी और शिकायतकर्ता को भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य पूरे इलाके में आतंक का माहौल बनाना था।
मुख्य आरोपी लगातार फरार चल रहा था। इसी दौरान स्पेशल स्टाफ को सूचना मिली कि वह आईपी एस्टेट स्थित कब्रिस्तान के पास आने वाला है। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस पर फायरिंग कर दी।पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी। घायल होने के बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस संबंध में थाना आईपी एस्टेट में पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के तहत अलग मुकदमा भी दर्ज किया गया।
घटना के बाद फरार हुए आरोपी शक्ति सिंह के कोलकाता में छिपे होने की जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम वहां पहुंची और उसे गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले आई।आईसीजेएस रिकॉर्ड के अनुसार शक्ति सिंह गौतमबुद्ध नगर के थाना इकोटेक-1 का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों में चोरी, सेंधमारी और चोरी का सामान रखने सहित 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार—पवन कुमार उर्फ पवन पहलवान– मुख्य शूटर और रंगदारी गिरोह का चेहरा।
शक्ति सिंह – मुख्य साजिशकर्ता और हिस्ट्रीशीटर।
विशाल भाटी उर्फ भांजा – योजना बनाने और अपराध को अंजाम देने में सहयोगी।
पवन कुमार उर्फ पवन चेतली – स्थानीय बिल्डर एवं होटल कारोबारी, जिसने पूरी साजिश को स्थानीय स्तर पर सहयोग दिया।
राजेश सचदेवा उर्फ सोनू मोटा– लॉजिस्टिक सपोर्ट और बैठकों की व्यवस्था करने वाला सहयोगी।
मुख्य आरोपी के कब्जे से पुलिस ने एक अत्याधुनिक पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस, तीन खाली खोखे और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है। जांच में पता चला कि यह बाइक मधु विहार थाना क्षेत्र से चोरी हुई थी और एक अन्य मामले में वांछित थी।
दिल्ली पुलिस अब मूल फायरिंग में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी, गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान, आर्थिक लेन-देन की जांच और पूरे आपराधिक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल पहाड़गंज की हाई-प्रोफाइल रंगदारी और फायरिंग की वारदात का खुलासा हुआ है, बल्कि अंतरराज्यीय अपराधियों और उनके स्थानीय सहयोगियों के गठजोड़ को भी बड़ा झटका लगा है।





