• Home
  • Crime News
  • Court & Judgements
  • Delhi Police Crime Update
  • Public Alerts
  • Law Explained
  • Disclaimer
  • Contact us
No Result
View All Result
Crime in Delhi
  • Home
  • Crime News
  • Court & Judgements
  • Delhi Police Crime Update
  • Public Alerts
  • Law Explained
  • Disclaimer
  • Contact us
No Result
View All Result
Crime in Delhi
No Result
View All Result
Home Court & Judgements

पुलिस जबरन अपराध कबूल करवाए तो क्या करें? | Police Force Confession

जानिए अपने कानूनी अधिकार

Ravi Tondak by Ravi Tondak
March 7, 2026
in Court & Judgements, Crime News, Law Explained
0
forced confession by police
325
SHARES
2.5k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में पुलिस को अपराध की जांच करने और आरोपियों से पूछताछ करने का अधिकार है। लेकिन कानून पुलिस को किसी भी व्यक्ति से मारपीट, धमकी या दबाव डालकर अपराध कबूल करवाने की अनुमति नहीं देता। दुर्भाग्य से कई मामलों में आरोपियों या संदिग्धों से जबरन कबूलनामा (Forced Confession) करवाने की कोशिश की जाती है।

You Might Also Like

Institutional Harassment: जब System ही Abuse का Tool बन जाए

Delhi Police 31 साल बाद इंसाफ: किडनैपिंग और मर्डर केस में फरार दोषी सलीम वास्टिक गिरफ्तार

Freebies vs Education: क्या “फ्री कल्चर” भारत में Crime को बढ़ावा दे रहा है?

ऐसी स्थिति में आम नागरिकों को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

यह लेख आपको बताएगा कि यदि पुलिस आपको अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करे तो कानून आपके लिए क्या सुरक्षा प्रदान करता है और आपको क्या करना चाहिए।

जबरन कबूलनामा कानूनन अवैध है

भारतीय कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अदालत में सामान्यतः स्वीकार्य साक्ष्य नहीं होता।

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 की धारा 23 के अनुसार: पुलिस अधिकारी के सामने किया गया कबूलनामा अभियुक्त के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए स्वीकार्य नहीं होता।

इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति से मारपीट या डराकर झूठा अपराध स्वीकार न करवाया जाए।

संविधान भी देता है सुरक्षा

भारतीय संविधान भी नागरिकों को जबरन कबूलनामे से सुरक्षा देता है।

अनुच्छेद 20(3) – किसी भी आरोपी को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसे “Right against Self-Incrimination” कहा जाता है।

अनुच्छेद 21 – हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। पुलिस द्वारा मारपीट या यातना देना इस अधिकार का उल्लंघन है।

अगर पुलिस मारपीट कर कबूलनामा लेने की कोशिश करे तो क्या करें?

यदि पुलिस पूछताछ के दौरान आपको मारती है या अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करती है, तो निम्न बातें ध्यान रखें:

1. सबसे पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें

यदि पुलिस अत्यधिक हिंसा कर रही है, तो अपनी जान बचाना सबसे महत्वपूर्ण है। कई बार लोग हिंसा रोकने के लिए मजबूरी में कुछ भी कह देते हैं। बाद में अदालत में इसकी सच्चाई बताई जा सकती है।

2. पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा सामान्यतः मान्य नहीं होता

कानून के अनुसार पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अदालत में अपराध सिद्ध करने के लिए स्वीकार नहीं किया जाता।

3. वैध कबूलनामा केवल मजिस्ट्रेट के सामने होता है

किसी भी कबूलनामे को कानूनी रूप से मान्य होने के लिए यह आवश्यक है कि:

  • वह स्वेच्छा से दिया गया हो

  • वह मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किया गया हो

  • उस समय पुलिस का कोई दबाव या उपस्थिति न हो

मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने पर क्या करें?

जब पुलिस आपको अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करे, तब तुरंत निम्न कदम उठाएं:

1. अदालत को सच बताएं

अपने वकील के माध्यम से मजिस्ट्रेट को बताएं कि:

  • पुलिस ने मारपीट की

  • दबाव डालकर कबूलनामा करवाने की कोशिश की

2. मेडिकल जांच की मांग करें

मजिस्ट्रेट से मेडिकल एग्जामिनेशन कराने का अनुरोध करें ताकि आपके शरीर पर चोटों का रिकॉर्ड बन सके।

यह आगे चलकर पुलिस के खिलाफ सबूत बन सकता है।

3. सबूत सुरक्षित रखें

यदि संभव हो तो निम्न प्रकार के सबूत एकत्र करें:

  • चोटों की फोटो

  • मेडिकल रिपोर्ट

  • सीसीटीवी फुटेज

  • गवाहों के बयान

पुलिस द्वारा हिरासत में हिंसा होने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि अदालत को यह पता चलता है कि पुलिस ने अवैध तरीके से मारपीट या दबाव बनाया है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

संभावित कार्रवाई:

  • विभागीय जांच

  • निलंबन (Suspension)

  • आपराधिक मामला दर्ज होना

  • पीड़ित को मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने D.K. Basu vs State of West Bengal (1997) मामले में गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत से संबंधित कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे।

इनमें प्रमुख निर्देश हैं:

  • गिरफ्तारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाए

  • परिवार के सदस्य को सूचना दी जाए

  • आरोपी का मेडिकल परीक्षण किया जाए

  • हिरासत में यातना न दी जाए

ये दिशा-निर्देश पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।

अपने अधिकार जानना क्यों जरूरी है?

भारत में कई लोग अपने कानूनी अधिकारों से अनजान होते हैं, जिसके कारण वे पुलिस के दबाव में आकर गलत कबूलनामा कर देते हैं।

यदि आपको अपने अधिकारों की जानकारी है तो:

  • आप अवैध दबाव से बच सकते हैं

  • अदालत में सही तरीके से अपनी बात रख सकते हैं

  • पुलिस की गैरकानूनी कार्रवाई के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं

कानून किसी भी व्यक्ति को पुलिस द्वारा मारपीट या दबाव डालकर अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं देता।

यदि पुलिस ऐसा करने की कोशिश करती है, तो याद रखें:

  • पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा सामान्यतः मान्य नहीं होता

  • वैध कबूलनामा केवल मजिस्ट्रेट के सामने ही होता है

  • अदालत को तुरंत जानकारी दें

  • मेडिकल जांच और सबूत सुरक्षित करें

कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी निर्दोष व्यक्ति से जबरन अपराध स्वीकार करवाना।

Related Articles

  • Bail Application Procedure in Delhi Courts 2026

  • How to File an FIR in Delhi 

  • What to Do If Delhi Police Refuse to Register an FIR 

Tags: Bharatiya Sakshya Adhiniyam 2023citizens legal rights indiacrime in delhi legal awarenesscriminal law awarenesscustodial violence indiaforced confession rightsknow your lawsKnow Your Legal Rightsknow your rightspolice confession law indiapolice custody rights
Previous Post

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो को मिला ISO 9001:2015 सर्टिफिकेशन

Next Post

महाराष्ट्र पुलिस ने जीता ऑल इंडिया पुलिस क्रिकेट टी-20 टूर्नामेंट का खिताब

Ravi Tondak

Ravi Tondak

I am an Advocate and Legal Consultant with expertise in criminal law, matrimonial disputes, and contract matters. On crimeindelhi.com, I write to explain legal developments, court judgments, and rights in a clear and easy-to-understand way. I also provide professional legal help and consultancy, guiding individuals through complex legal issues and offering practical solutions to protect their interests. Contact me for legal help and consultant.

Related News

institutional harrasment

Institutional Harassment: जब System ही Abuse का Tool बन जाए

by Ravi Tondak
April 26, 2026
0

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में institutions का मूल उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और न्याय सुनिश्चित करना होता...

Delhi Police 31 साल बाद इंसाफ: किडनैपिंग और मर्डर केस में फरार दोषी सलीम वास्टिक गिरफ्तार

Delhi Police 31 साल बाद इंसाफ: किडनैपिंग और मर्डर केस में फरार दोषी सलीम वास्टिक गिरफ्तार

by Shahzad Ahmed
April 25, 2026
0

नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 31 साल पुराने अपहरण और हत्या...

freebies or education

Freebies vs Education: क्या “फ्री कल्चर” भारत में Crime को बढ़ावा दे रहा है?

by Ravi Tondak
April 23, 2026
0

यह सिर्फ Budget का मुद्दा नहीं है आज भारत में freebies को लेकर गंभीर बहस चल रही है। सरकारें बड़े...

मिंटो रोड पर पुलिस की मुस्तैदी: कुख्यात स्नैचर गिरफ्तार, चोरी की स्कूटी और चाकू बरामद

मिंटो रोड पर पुलिस की मुस्तैदी: कुख्यात स्नैचर गिरफ्तार, चोरी की स्कूटी और चाकू बरामद

by Shahzad Ahmed
April 18, 2026
0

नई दिल्ली,सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में पुलिस की सतर्क पेट्रोलिंग टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो कुख्यात स्नैचरों को गिरफ्तार...

Next Post
महाराष्ट्र पुलिस ने जीता ऑल इंडिया पुलिस क्रिकेट टी-20 टूर्नामेंट का खिताब

महाराष्ट्र पुलिस ने जीता ऑल इंडिया पुलिस क्रिकेट टी-20 टूर्नामेंट का खिताब

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर दिल्ली पुलिस के व्यापक कार्यक्रम,महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर दिया विशेष जोर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर दिल्ली पुलिस के व्यापक कार्यक्रम,महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर दिया विशेष जोर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Crime News

  • Delhi Police नशा मुक्त समाज की ओर कदम: दिल्ली पुलिस का ‘Nasha – Not Cool’ अभियान तीसरे दिन और हुआ प्रभावशाली
  • Institutional Harassment: जब System ही Abuse का Tool बन जाए
  • Delhi Police नशा – Not Cool अभियान का दूसरा दिन: खेलों के ज़रिए युवाओं को नशे से दूर रखने की पहल
  • ‘नशा – Not Cool’: दिल्ली पुलिस का एंटी-ड्रग अभियान शुरू, 1 लाख से अधिक छात्रों ने ली शपथ
  • Delhi Police 31 साल बाद इंसाफ: किडनैपिंग और मर्डर केस में फरार दोषी सलीम वास्टिक गिरफ्तार
  • Crime News
  • Law Explained
  • Privacy Policy

Categories

  • Home
  • Crime News
  • Court & Judgements
  • Delhi Police Crime Update
  • Public Alerts
  • Law Explained
  • Disclaimer
  • Contact us

Recent Posts

  • Delhi Police नशा मुक्त समाज की ओर कदम: दिल्ली पुलिस का ‘Nasha – Not Cool’ अभियान तीसरे दिन और हुआ प्रभावशाली
  • Institutional Harassment: जब System ही Abuse का Tool बन जाए
  • Delhi Police नशा – Not Cool अभियान का दूसरा दिन: खेलों के ज़रिए युवाओं को नशे से दूर रखने की पहल
  • ‘नशा – Not Cool’: दिल्ली पुलिस का एंटी-ड्रग अभियान शुरू, 1 लाख से अधिक छात्रों ने ली शपथ

Most Viewed

  • Delhi Police नशा मुक्त समाज की ओर कदम: दिल्ली पुलिस का ‘Nasha – Not Cool’ अभियान तीसरे दिन और हुआ प्रभावशाली
  • Institutional Harassment: जब System ही Abuse का Tool बन जाए
  • Delhi Police नशा – Not Cool अभियान का दूसरा दिन: खेलों के ज़रिए युवाओं को नशे से दूर रखने की पहल

© 2025-26 Crime in Delhi – Designed by Website Designing Company CrimeinDelhi.

No Result
View All Result
  • Contact us
  • Disclaimer
  • Home
  • Privacy Policy

© 2025-26 Crime in Delhi – Designed by Website Designing Company CrimeinDelhi.