संज्ञेय अपराधों (Cognizable Offences) के मामलों में एफआईआर (FIR) का दर्ज करना अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य अपराध की तत्काल जांच सुनिश्चित करना तथा पुलिस के विवेकाधिकार के दुरुपयोग को रोकना है।
दिल्ली में FIR या तो पुलिस थाने में व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन माध्यम से दर्ज की जा सकती है। अब नए कानून के हिसाब से FIR पंजीकरण की प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) द्वारा नियंत्रित होती है, विशेष रूप से धारा 173 BNSS, 2023 के अंतर्गत। इस नई संहिता में ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) और ई-एफआईआर (e-FIR) को विधिक मान्यता दी गई है।
यदि थाना प्रभारी (SHO) FIR दर्ज करने से मना करता है, तो शिकायतकर्ता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भी जा सकता है।
नवीन कानून एवं प्रमुख परिवर्तन:
पहले एफआईआर पंजीकरण धारा 154 CrPC के अंतर्गत होता था, अब यह धारा 173 BNSS, 2023 द्वारा शासित है।
ज़ीरो एफआईआर और ई-एफआईआर को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है।
सूचना मौखिक, लिखित (oral or written) या इलेक्ट्रॉनिक (Electronic) माध्यम से दी जा सकती है। यदि सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती है, तो 3 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, अन्यथा उसे विधिवत एफआईआर नहीं माना जा सकता।
दिल्ली में पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया (धारा 173(1), BNSS, 2023)
1. आप किसी पुलिस थाने में जाएँ (Physically)
आप किसी भी पुलिस थाने में जा सकते हैं। क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की परवाह किए बिना ज़ीरो एफआईआर दर्ज की जा सकती है, जिसे बाद में सक्षम थाने में स्थानांतरित किया जाता है।
2. सूचना दें (मौखिक या लिखित, oral or written)
घटना का विवरण दें: तिथि, समय, स्थान, घटना का क्रम, अभियुक्त (यदि ज्ञात हो) तथा गवाह । मौखिक सूचना को पुलिस अधिकारी लिखित रूप में दर्ज करेगा, पढ़कर सुनाएगा और शिकायतकर्ता से हस्ताक्षर कराएगा।
3. धारा 173 BNSS के अंतर्गत FIR पंजीकरण करें
यदि तथ्यों से संज्ञेय (cognizable ) अपराध (जैसे चोरी, मारपीट, बलात्कार, गंभीर धोखाधड़ी आदि) प्रकट होता है, तो पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह एफआईआर दर्ज करे।
4. FIR पर हस्ताक्षर करें और निःशुल्क प्रति प्राप्त करें
शिकायतकर्ता को एफआईआर की निःशुल्क प्रति प्राप्त करने का अधिकार है।
5. यदि SHO एफआईआर (FIR ) दर्ज करने से इंकार करे
शिकायत लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप से DCP/ACP/CP को भेजी जा सकती है। या धारा 173(4) सहपठित धारा 175(3) BNSS, 2023 (पूर्व धारा 156(3) CrPC) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन किया जा सकता है।
दिल्ली में ई-एफआईआर / ऑनलाइन एफआईआर (E-FIR / Online FIR) की प्रक्रिया (धारा 173(1) का प्रावधान, BNSS, 2023)
दिल्ली पुलिस की Online Citizen Services (CCTNS) या ई-पुलिस स्टेशन पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है। साइबर अपराधों के लिए: www.cybercrime.gov.in पर संपर्क कर सकते है |
उपयुक्त सेवा चुनें – “e-FIR” या “File a Complaint” (वर्तमान में दिल्ली में ऑनलाइन एफआईआर (online FIR) मुख्यतः चोरी, वाहन चोरी और दस्तावेज़ गुम होने जैसे मामलों में उपलब्ध है)
- घटना का विवरण भरें और सबमिट करें।
- 3 दिनों के भीतर हस्ताक्षर अनिवार्य।
- पंजीकरण के पश्चात ई-एफआईआर (e-FIR) की प्रति (copy) प्राप्त करें।
BNSS, 2023 के अंतर्गत ई-एफआईआर (e-FIR) को वैधानिक मान्यता प्राप्त है।
BNSS के अंतर्गत एफआईआर (FIR) से संबंधित महत्वपूर्ण बातें:
संज्ञेय एवं असंज्ञेय अपराध (Cognizable and Non-Cognizable Offenses): धारा 173(3), BNSS, 2023 – एफआईआर (FIR) केवल संज्ञेय अपराधों में दर्ज़ की जाती है। 3 से 7 वर्ष तक के दंडनीय अपराधों में पुलिस प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) कर सकती है। यह जांच 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
यह बातें केस लॉ Lalita Kumari बनाम State of Uttar Pradesh (2014) में बताई गयी थी |
पुलिस का दायित्व एवं पीड़ित के अधिकार:
पुलिस का दायित्व – संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
पीड़ित को:
एफआईआर (FIR) की निःशुल्क प्रति (Free copy)
जांच की प्रगति की जानकारी
वरिष्ठ अधिकारियों या न्यायालय से संपर्क करने का अधिकार है।
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR ) – किसी भी पुलिस थाने में दर्ज की जा सकती है। उसके बाद उसे सक्षम (competent) थाने में स्थानांतरित किया जाता है। ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR ) का यह उद्देश्य होता है की किसी भी व्यक्ति को देरी की वजह से और न्याय से वंचित न रखा जाये।
महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के लिए FIR दर्ज़ करने के विशेष बिंदु – यौन अपराधों में एफआईआर (FIR) महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज की जाएगी। बयान (statement) पीड़िता के निवास या उनके बताये हुए स्थान पर लिया जा सकता है। दिव्यांग व्यक्तियों (persons with disabilities) के लिए ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गयी है।
दिल्ली के शिकायतकर्ताओं के लिए FIR दर्ज़ करने के लिए सुझाव:
घटना की सटीक तिथि, समय और स्थान लिखें।
सहायक दस्तावेज़ (supporting documents) साथ रखें।
देरी होने पर डीडी (Daily Diary) एंट्री नंबर लें।
ऑनलाइन शिकायत की रसीद सुरक्षित रखें।
एफआईआर पंजीकरण (FIR Registration) पर दिल्ली उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय:
State of NCT of Delhi v. Puran Singh
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कथित फर्जी मुठभेड़ में मृत्यु हुई हो और संदेहास्पद परिस्थितियाँ हों, तो एफआईआर अनिवार्य रूप से दर्ज की जानी चाहिए। एफआईआर का उद्देश्य जांच है, न कि दोष का पूर्व निर्धारण।
X v. State (NCT of Delhi) (2025)
जहाँ अपराध उसी क्षेत्राधिकार में हुआ हो, वहाँ नियमित एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, न कि केवल ज़ीरो एफआईआर।
Harmeet Singh v. State (NCT of Delhi)
मजिस्ट्रेट वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (DCP आदि) को एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकता। वह केवल थाना प्रभारी को जांच का निर्देश दे सकता है।
Kulvinder Singh Kohli v. State (NCT of Delhi)
एफआईआर के बिना पुलिस समन जारी नहीं कर सकती, क्योंकि बिना एफआईआर कोई विधिसम्मत जांच संभव नहीं। हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस FIR दर्ज किए बिना सेक्शन 160 CrPC के तहत समन जारी नहीं कर सकती, क्योंकि FIR के बिना कोई औपचारिक जांच नहीं होती। यह क्रिमिनल प्रोसीजर में FIR की बुनियादी भूमिका को बताता है। FIR दर्ज किए बिना जांच (जिसमें समन जारी करना भी शामिल है) कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ सकती।
मजिस्ट्रेट कब एफआईआर दर्ज कराने हेतु आदेश दे सकता है
संज्ञेय अपराध का प्रकटीकरण (Disclosure of a cognizable offense)
न्यायिक विवेक का प्रयोग (Exercise of judicial discretion)
कारणयुक्त आदेश (Speaking Order)
BNSS, 2023 ने डिजिटल FIR शुरू करके, समय-सीमा वाली शुरुआती जांच को अनिवार्य करके, और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को मज़बूत करके FIR रजिस्ट्रेशन को आधुनिक बनाया है।
हालांकि, संज्ञेय अपराधों के लिए अनिवार्य FIR रजिस्ट्रेशन का मुख्य सिद्धांत अपरिवर्तित है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने लगातार कहा है।







