नई दिल्ली। राजधानी में संभावित आतंकी गतिविधियों को लेकर की गई एक समन्वित कार्रवाई में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कथित तौर पर Lashkar-e-Taiba से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन दिल्ली, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) और तिरुप्पुर (तमिलनाडु) में एक साथ चलाया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों में सात बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं, जो कथित रूप से फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेजों के सहारे देश में रह रहे थे।
पोस्टर प्रकरण से खुला नेटवर्क का सुराग
जांच की शुरुआत 8 फरवरी 2026 को उस समय हुई जब Janpath Metro Station पर कथित रूप से प्रो-पाकिस्तान और आतंकी समर्थन वाले पोस्टर लगाए जाने की सूचना मिली। प्राथमिक जांच में ऐसे पोस्टर दिल्ली के कई स्थानों पर पाए गए। इन पोस्टरों में उग्रवादी विचारधारा से जुड़े संदेश और मारे गए आतंकी Burhan Wani की तस्वीरें होने की बात सामने आई।
मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच स्पेशल सेल को सौंपी गई, जिसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई तेज की गई।
बहु-राज्यीय छापेमारी और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार:
-
15 फरवरी को कोलकाता के माझेरपाड़ा और हातियारा गोटे क्षेत्र में छापेमारी कर दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
-
21 फरवरी को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में समन्वित अभियान चलाकर छह अन्य संदिग्धों को पकड़ा गया।
गिरफ्तार व्यक्तियों में उमर फारुक और रोबिउल इस्लाम सहित अन्य बांग्लादेशी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि यह समूह कथित रूप से एक विदेशी हैंडलर के निर्देश पर सक्रिय था।
कथित मास्टरमाइंड और नेटवर्क की भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा उर्फ कश्मीरी नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के कंगन क्षेत्र का निवासी बताया जाता है और वर्तमान में बांग्लादेश में छिपा होने की आशंका है।
पुलिस का कहना है कि:
-
वह पूर्व में हथियार और विस्फोटक से जुड़े मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
-
उसके आतंकी संगठन के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क रहे हैं।
-
जेल से रिहाई के बाद उसने कथित रूप से विदेश में शरण लेकर भारत में स्लीपर सेल सक्रिय करने की कोशिश की।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के दायरे में है।
संवेदनशील स्थलों की रेकी और डिजिटल साक्ष्य
पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि आरोपियों ने कथित रूप से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी कर वीडियो रिकॉर्डिंग अपने हैंडलर को भेजी। पुलिस के अनुसार, उन्हें हथियारों की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए थे।
कोलकाता में किराए के मकान को संचालन केंद्र के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है।
बरामदगी
स्पेशल सेल ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद करने का दावा किया है:
-
कथित उग्रवादी समर्थन वाले पोस्टर
-
10 मोबाइल फोन, जिनमें आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री
-
25 डेबिट/क्रेडिट कार्ड
-
5 पीओएस मशीनें
-
बांग्लादेशी पासपोर्ट और पहचान दस्तावेज
जब्त सामग्री की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच जारी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समय रहते इस नेटवर्क को ध्वस्त कर संभावित आतंकी साजिश को विफल किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बहु-राज्यीय समन्वय और तकनीकी निगरानी के कारण यह कार्रवाई संभव हो सकी।
राजधानी में यह ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और सतर्कता को दर्शाता है। हालांकि आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।






