ख़ाकी वर्दी पहने एक जवान—जो समाज की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पूरी सच्चाई, ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभाती है। लेकिन अक्सर हम उस इंसान को भूल जाते हैं, जो इस वर्दी के पीछे सांस लेती है, दर्द सहती है और अपने जज़्बातों को भीतर दबाकर समाज की रक्षा में खड़ी रहती है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर दिल्ली पुलिस ने राजधानी के सभी जिलों और इकाइयों में व्यापक स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित कर महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण और जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान विभिन्न जिलों में जागरूकता अभियान, सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा सत्र, स्वास्थ्य शिविर, स्कूटी रैली, पदयात्रा, सम्मान समारोह और सामुदायिक संवाद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में महिलाओं की भूमिका को सम्मानित करना था।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम बात कर रहे हैं दिल्ली पुलिस की उन महिला जवानों की, जो दिन-रात राजधानी को सुरक्षित रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ये महिला पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहकर, हर परिस्थिति में सबसे पहले अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देती हैं।

दिल्ली के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक जीबी रोड (श्रद्धानंद मार्ग) है, जिसे आमतौर पर रेड लाइट एरिया के रूप में जाना जाता है। इस इलाके का नाम सुनते ही लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं बन जाती हैं, लेकिन यहां ड्यूटी करना किसी भी पुलिसकर्मी—खासकर महिला पुलिसकर्मी—के लिए आसान नहीं होता।

श्रद्धानंद मार्ग महिला पुलिस चौकी की इंचार्ज किरण सेठी और उनके साथ तैनात महिला पुलिस स्टाफ ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में 24 घंटे जनता की सेवा में जुटे रहते हैं, जहां हर दिन नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यहां आने वाले कई लोग मानसिक रूप से अस्थिर होते हैं, कुछ नशे की हालत में होते हैं, तो कई बार ऐसे लोग भी मिलते हैं जिनकी भाषा और व्यवहार बेहद आपत्तिजनक होता है।
ऐसे माहौल में पब्लिक डीलिंग करना, अपराध पर नियंत्रण रखना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। इसके बावजूद महिला पुलिसकर्मी पूरे संयम, साहस और पेशेवर रवैये के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं।
बरसात हो या कड़ाके की सर्दी, भीषण गर्मी हो या तूफान—
जब ख़ाकी वर्दी शरीर पर होती है, तो फिर सिर्फ़ देश और जनता ही परिवार बन जाते हैं।
एक पुलिसकर्मी अपना परिवार पीछे छोड़कर, जनता के परिवार की सुरक्षा के लिए हर वक्त खड़ी रहती है।
सलाम है ऐसी बेटियों को—
जिनके जज़्बे और समर्पण के आगे शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं।जो अपने सुख-दुख और जज़्बातों को एक तरफ रखकर, पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभा रही हैं।
दिल्ली पुलिस—शांति, सेवा और न्याय के अपने मूल मंत्र के साथ सदैव तत्पर है।खास तौर पर महिला पुलिसकर्मी हर दिन यह साबित कर रही हैं कि वर्दी सिर्फ पहचान नहीं होती, बल्कि यह त्याग, साहस और इंसानियत की मिसाल होती है।





