Delhi Police ki Central District Cyber Police ne haal ही में एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, एक साधारण से दिखने वाले ₹10,000 के ऑनलाइन फ्रॉड की जांच के दौरान ऐसा संगठित नेटवर्क सामने आया, जिसके जरिए कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जा रहे थे। जांच में सामने आया कि इन खातों के माध्यम से ₹70 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि “म्यूल अकाउंट (Mule Account)” साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं।
Mule Account होता क्या है?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह द्वारा अवैध धन के लेन-देन के लिए किया जाता है।
अक्सर खाते का असली मालिक यह दावा करता है कि उसे पता ही नहीं था कि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा है। कई मामलों में लोग थोड़े से पैसे या नौकरी के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेक बुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी दूसरों को दे देते हैं।
साइबर अपराधी Mule Account का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
जब किसी साइबर ठगी से पैसा मिलता है तो अपराधी उसे सीधे अपने खाते में नहीं रखते। वे कई अलग-अलग बैंक खातों में पैसा घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं।
इसी प्रक्रिया में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है ताकि जांच एजेंसियों के लिए पैसे के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
लोग इस जाल में कैसे फंसते हैं?
साइबर अपराधी अक्सर बेरोजगार युवाओं, छात्रों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं।
वे कई तरह के लालच देते हैं, जैसे—
- घर बैठे कमाई का ऑफर
- पार्ट टाइम जॉब
- कमीशन के बदले बैंक अकाउंट किराये पर देना
- कंपनी के नाम पर अकाउंट खुलवाने का प्रस्ताव
- बैंकिंग एजेंट बनने का झांसा
कई लोग बिना परिणाम समझे अपने दस्तावेज और बैंकिंग सुविधाएं सौंप देते हैं।
अगर आपने अपना बैंक अकाउंट किसी और को दिया तो क्या हो सकता है?
यदि आपके खाते का उपयोग साइबर अपराध में होता है, तो जांच एजेंसियां सबसे पहले उसी खाते तक पहुंचती हैं।
ऐसी स्थिति में—
- आपका बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।
- पुलिस पूछताछ के लिए बुला सकती है।
- आपके मोबाइल, दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड की जांच हो सकती है।
- यदि जानबूझकर सहयोग करने के सबूत मिलते हैं तो आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
हर मामले में जिम्मेदारी तथ्यों और जांच पर निर्भर करती है।
दिल्ली पुलिस की हालिया कार्रवाई से क्या सीख मिलती है?
हालिया जांच में दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले जा रहे थे और कथित तौर पर उनके जरिए साइबर अपराधियों को “बैंक अकाउंट किट” उपलब्ध कराई जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान—
- 248 बैंक अकाउंट किट
- 38 सक्रिय सिम कार्ड
- 22 मोबाइल फोन
- 55 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
- 28 फर्जी रबर स्टैंप
- ₹1 लाख नकद
बरामद किए गए। मामले की जांच अभी जारी है और सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
✔ अपना बैंक अकाउंट किसी को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
✔ एटीएम कार्ड, चेक बुक, पासबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी साझा न करें।
✔ किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से कंपनी या चालू खाता न खुलवाएं।
✔ आसान कमाई या बैंक अकाउंट किराये पर देने जैसे प्रस्तावों से सावधान रहें।
✔ किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
म्यूल अकाउंट केवल एक बैंक खाता नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए अवैध धन को छिपाने का माध्यम बन सकता है। दिल्ली पुलिस की हालिया कार्रवाई यह दर्शाती है कि जांच एजेंसियां अब ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इसलिए कुछ हजार रुपये या आसान कमाई के लालच में कभी भी अपना बैंक खाता, दस्तावेज या बैंकिंग सुविधाएं किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।





