नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान सलीम खान उर्फ सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्टिक (54 वर्ष) के रूप में हुई है, जो हाल के वर्षों में खुद को सोशल एक्टिविस्ट और यूट्यूबर के रूप में पेश कर रहा था।
डीसीपी क्राइम ब्रांच संजीव कुमार यादव ने बताया कि यह मामला 20 जनवरी 1995 का है, जब गोकुलपुरी निवासी सीमेंट कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल घर से स्कूल जाने के लिए निकला,लेकिन वापस नहीं लौटा। वह रामजस स्कूल दरियागंज का छात्र था।
अगले दिन, 21 जनवरी को उसके पिता को फोन आया, जिसमें अपहरणकर्ताओं ने बच्चे के बदले ₹30,000 की फिरौती मांगी और पुलिस को सूचना देने पर जान से मारने की धमकी दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान संदेह सलीम खान पर गया, जो उसी स्कूल में मार्शल आर्ट्स ट्रेनर था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बच्चे को “मास्टरजी” के साथ जाते हुए देखा था। पुलिस ने सलीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपराध कबूल किया और पुलिस को Mustafabad स्थित एक नाले तक ले गया, जहां से बच्चे का शव बरामद हुआ। शव की पहचान परिजनों ने की।
जांच में उसके साथी अनिल की भी भूमिका सामने आई, जिसने फिरौती की कॉल की थी और पूरी साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
5 अगस्त 1997 को दोनों आरोपियों को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।सलीम खान को वर्ष 2000 में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली। जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया और कभी वापस कोर्ट में पेश नहीं हुआ। 2011 में हाईकोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन तब तक वह कानून से बचता रहा।
फरारी के दौरान सलीम ने खुद को “मृत” घोषित करवा दिया ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।उसने अपनी पहचान बदलकर सलीम वास्टिक / सलीम अहमद रख ली और हरियाणा के करनाल व अंबाला में छिपकर रहने लगा।
बाद में वह लोनी (उत्तर प्रदेश) में बस गया, जहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली और सामान्य जीवन जीने लगा। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय था और खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर के रूप में प्रस्तुत करता था।इसी पहचान के चलते वह लंबे समय तक लोगों और एजेंसियों की नजर से बचा रहा।
क्राइम ब्रांच की ARSC टीम को गुप्त सूचना मिली कि एक यूट्यूबर दरअसल 1995 के हत्या मामले का फरार अपराधी है।टीम ने पुराने रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट और तस्वीरों के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि की।इसके बाद एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने यूपी पुलिस के सहयोग से लोनी में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
फरवरी 2026 में आरोपी पर लोनी में चाकू से हमला हुआ था। गंभीर रूप से घायल होने पर उसे गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल और बाद में मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।इस घटना के बाद उसे उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा सुरक्षा भी दी गई थी।
जन्म: 1972, शामली (उत्तर प्रदेश)
पेशा: मार्शल आर्ट्स ट्रेनर, बाद में कपड़ा व्यापारी,
विशेष कौशल: शाओलिन कुंग-फू
परिवार: पत्नी, एक बेटा और एक बेटी
आपराधिक इतिहास: अपहरण और हत्या में दोषी, उम्रकैद,गिरफ्तारी के बाद सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आरोपी को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि कानून से भागना संभव नहीं है।“चाहे अपराधी कितने भी साल छिप जाए, कानून के लंबे हाथ उसे पकड़ ही लेते हैं।”







